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अनेक साहित्यकारों के निर्माता थे आचार्य तुलसी : आचार्य महाश्रमण

Lens Eye - News Portal - अनेक साहित्यकारों के निर्माता थे आचार्य तुलसी: आचार्य महाश्रमण नई दिल्ली, 28 अक्टूबर, 2014 :: अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य महाश्रमण के सान्निध्य में अध्यात्म साधना केन्द्र के वर्धमान समवसरण में ‘आचार्य तुलसी स्मृति ग्रन्थ लोकार्पण-द्वितीय चरण’ का आयोजन हुआ। गांधी शांति प्रतिष्ठान के नेशनल यूथ प्रोजेक्ट के अध्यक्ष डाॅ. एस.एन. सुव्वाराव मुख्य अतिथि थे। आचार्य तुलसी जन्म शताब्दी वर्ष की इस प्रस्तुति के बारे में आचार्यश्री ने कहा कि भारत के राष्ट्रपति की उपस्थिति में ग्रन्थ का लोकार्पण अपने आपमें महत्त्वपूर्ण है। यह महाग्रन्थ देखने में अच्छा लग रहा है। भेंट में एक मिनट का समय लगा किन्तु इसे तैयार करने में कितनों का श्रम लगा है। ‘परस्परोग्रहो जीवानाम’ अर्थात पूरी टीम का आपसी सहयोग का मूर्तरूप यह महाग्रन्थ है। बहुत सी विरल जानकारियों से युक्त यह ग्रन्थ जीवन को नई दिशा देने वाला है। इस ग्रन्थ को हम स्वीकार करते हैं और यह पाठकों के लिए प्रेरणादायी बने ऐसी शुभाषंसा करते हैं।

तेरापंथ के नौवें आचार्य तुलसी ने संभवतः प्रथम आचार्य भिक्षु की तरह झुलसती गर्मी में आतापना लेकर तपस्या नहीं की थी किन्तु उन्होंने जीवन में जिन भीषण विरोधों को सहन किया वो भी कम बड़ी तपस्या नहीं थी, बहुमुखी प्रतिभा के धनी महापरिवाज्रक आचार्य तुलसी आगम संपादन के वाचनाकार, प्रवचनकार, गीतकार, संगीतकार साहित्यकार तो थे ही – वे साहित्यकारों के भी निर्माता थे – ऐसे महापुरुष की स्मृति उनका स्मरण, उनका स्तवन सब आत्म उत्थान में सहायक है। आचार्य तुलसी का समाधिस्थल, गंगाशहर – नैतिकता का शक्तिपीठ है। आचार्य महाप्रज्ञ का समाधि स्थल सरदारशहर में शक्ति पीठ है। हमारे जीवन में शक्ति और शांति दोनों आये।

Lens Eye - News Portal - अनेक साहित्यकारों के निर्माता थे आचार्य तुलसी: आचार्य महाश्रमणआचार्य तुलसी द्वारा निर्मित महान साहित्यकार साध्वी प्रमुखाश्रीजी ने कहा आचार्य तुलसी का जीवन आष्चर्यों की वर्णमाला था। उनका अटल मनोबल, अगम्य साहस अनुकरणीय है। स्मृति ग्रन्थ यात्रा दो प्रकार से हो सकती है – अन्तरंग यात्रा बहिरंग यात्रा – उनके विचारों व व्यक्तित्व की गहराई व ऊंचाई में पहुंचने में यह महाग्रन्थ सहायक बनेगा ऐसा हमारा विष्वास है।

साध्वीवृृन्द ने तुलसी प्रबोध की प्रस्तुति दी। मुनि श्री सुखलाल, मुनिश्री धर्मरूचि ने अपने सारगर्भित विचार रखे।

मुख्य अतिथि एस.एन. सुव्वाराव ने महान युगपुरुश की शिक्षाओं को जीवन में उतार कर राश्ट्र निर्माण में सहभागी बनने की अपील की।

मुख्य संपादक अजय चैपड़ा ने बताया कि 28 अक्टूबर, 2012 को प्रारम्भ यह ऐतिहासिक दस्तावेज आचार्य तुलसी के जीवन और उनसे जुड़े लोगों की कहानी है। इसमें दलाईलामा से लेकर वेटिकन सीटी के पोप समेत प्रतिश्ठित धर्म गुरुओं के, राष्ट्रपति , पूर्व राष्ट्रपति समेत महत्वपूर्ण राजनैतिक, सामाजिक, साहित्यिक हस्तियों के सन्देश और अनेकों लब्ध प्रतिश्ठित महानुभावों के आलेख व स्मृृतियां हैं।

सह संपादक अजीत जैन ने बताया कि एशिया की प्रमुख प्रेस प्रगति प्रिंटर्स हैदराबाद ने इसे प्रिंट किया है। आचार्य तुलसी जन्म शताब्दी समारोह के समिति संयोजक कमल दुगड़ ने बताया कि समिति इस महत्वपूर्ण ग्रन्थ को प्रकाशित करके गौरव का अनुभव कर रही है। आचार्य महाश्रमण प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष के.एल. जैन पटावरी ने अतिथियों का स्वागत किया। श्री लूणकरण छाजेड़ का सामयिक वक्तव्य हुआ। कार्यक्रम का कुशल संचालन मुनिश्री दिनेश कुमारजी ने किया।

प्रेषक – डाॅ. कुसुम लूणिया

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