अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर Lens Eye विशेष :: जिन्दगी के लिए मिशाल और जमाने के लिए प्रेरणा : कुन्ती
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अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर Lens Eye विशेष :: जिन्दगी के लिए मिशाल और जमाने के लिए प्रेरणा : कुन्ती

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर Lens Eye विशेष :: जिन्दगी के लिए मिशाल और जमाने के लिए प्रेरणा : कुन्ती

•  15 सौ महिला समूहों का गठन कर 25 हजार से अधिक महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ बनाया आत्मनिर्भर
अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर Lens Eye विशेष :: जिन्दगी के लिए मिशाल और जमाने के लिए प्रेरणा : कुन्तीलोहरदगा, झारखण्ड 08 मार्च 2015 :: उसने सामाजिक धारनाओं को तोड़कर अपना मुकाम बनाने का निश्चय किया और अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर जता दिया कि हौसले अगर बुलन्द हों, मंजिल पाना मुश्किल नहीं। लोहरदगा के सदर प्रखंड स्थित कुटमू-चिगलाटोली निवासी राममोहन साहु के घर जन्मी कुन्ती साहु ने महिला सशक्तिकरण का जो मिशाल कायम की है, वह जमाने के लिए प्रेरणास्त्रोत है। उसकी संघर्षशीलता व महिला सशक्तिकरण के कार्य से प्रभावित हो वर्ष 2008 में तत्कालिन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अर्द्धांग्नि श्रीमती गुरप्रीत कौर ने दिल्ली स्थित आवास में अपने साथ भोजन भी कराया है।अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर Lens Eye विशेष :: जिन्दगी के लिए मिशाल और जमाने के लिए प्रेरणा : कुन्ती उसने बलदेव साहु महाविद्यालय में उच्च शिक्षा की पढ़ाई करते हुये रांची विश्वविद्यालय से संस्कृत विषय में स्नातक की डीग्री ली। महिला होने के स्वरूप को सार्थक करने के लिये उन्होंने 2 जनवरी 1997 को एक स्थानीय एनजीओ लोहरदगा ग्राम स्वराज संस्थान से जुड़ गयी। वह कहती है कि प्रारंभिक दौर में उसके अंदर बहुत हिचक और घबराहट थी, लेकिन  संस्थान के सचिव चन्द्रपति यादव, कोषाध्यक्ष शेख यासीन अंसारी, वजिर अंसारी ने हौसला अफजायी की, फिर वह कभी पीछे मुड़कर नहीं देखी। वह अपने हिचक को तोड़ अपनी स्कूटी बाईक पर सवार हो दुरसत ग्रामीण इलाके में जा-जा कर महिलाओं को उत्साहित करने लगी उसने ग्रामीण महिलाओं  को एक सूत्र में बाधना शुरू कर दी। उसने 15 सौ के करीब महिला समूहों का गठन कर उन्हें बही  खाता संधारण, नियमावली, आय वृद्धि कार्यक्रम की शिक्षण प्रशिक्षण का कार्य बड़े सफलता पूर्वक करी। उन्हें वर्मी कम्पोट, मुर्गी पालन, शुकर पालन, बकरी पालन, गाय पालन, मसरूम की खेती, स्वास्थ्य शिक्षा, खाद् सुरक्षा, धन कुटी आदि का प्रशिक्षण दिलाकर सिधे बैंक से जोड़कर पूजी की व्यवस्था करायी और रोजगार से जोड़ दिया। जिससे 25 हजार से अधिक ग्रामीण महिलाएं  स्वरोजगार से जुड़कर हजारों कमा आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर व स्वलांबी बन गयीं। साथ ही स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 476 ग्रामीण महिलाओं को सहिया का प्रशिक्षण करायी, जो अपने आप में सबसे बड़ी मिसाल है। वह कहती है कि तत्कालिन उपायुक्त ज्योत्सना वर्मा रे ने प्रशासनिक स्तर पर मदद नहीं करती, तो वह अपने मकशद में कभी कामयाब न हो पाती। उसकी मेहनत ने रंग लाया। और जिले से उषा खाखा, सुनीता भगत, सरोज देवी, ललिता खलखो, विराज देवी, सुमति कच्छप, सुशीला कुमारी आदि महिलाएं जिला से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक कई पुरस्कार अजिर्त की हैं। जिनमें सुनीता भगत , सरोज देवी, ललीता खलखो, विराज देवी ने राष्ट्रपति  के हाथों  से पुरुस्कृत हो चुके है।

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं से कहना चाहती है कि “महिलाओं को चाहिये कि वे अपने अन्दर की नारी शक्ति को पहचानें, अपने टैलेंट को समझें, किसी की मदद का इन्तजार न करें और दिखा दें की वह किसी से कम नहीं”.
Report & Photograph by Quaiyum Khan, Lohardaga, Jharkhand.

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