कलश विसर्जन का महत्व

Lens Eye - News Portal -कलश विसर्जन का महत्वरांची, 20  अप्रैल 2013 :: रांची के जाने माने  ज्योतिष  डॉ सुनील बर्मन [ स्वामी दिव्यानंद ] के अनुसार हिन्दू धर्म में नवरात्र के प्रथम दिन कलश की स्थापना की जाती है तथा  वरुण देव के साथ ब्रह्माण्ड की अन्य शक्तियों का मंत्रो के द्वारा आह्वान कर कलश में स्थान दिया जाता है और ये मान्यता है की सभी देवी देवता कलश में विराजमान हो गए। इसके अलावा प्रधान देवता की विशिस्ट रूप से पूजा की जाती है.

Lens EYe - News Portal - कलश विसर्जन का महत्वसम्पूर्ण नवरात्र में सर्वप्रथम गौर गणेश नवग्रह षोड्स  मात्रिका, पंच  देवता के साथ वरुण देव [ कलश ] के उपरांत प्रधान पूजा [ भगवती ] की आराधना करते है और अंत में दशमी के दिन विधिपूर्वक विसर्जन करते है.

विसर्जन के अंतर्गत कलश विसर्जन का विधान सबसे महत्वपूर्ण है. जिस प्रकार सभी देवी देवताओ को मंत्रो के द्वारा कलश में स्थापित किया गया था ठीक उसी प्रकार देवी देवताओ के प्रति कृतज्ञता महसूस करते है की  भगवान आप हमारे पूजन को सफल बनाने हेतु आप आये पर हम सांसारिक है इसलिए स्थाई रूप से आपको रखने का सामर्थ नहीं है इसलिए यह प्रार्थना करते है की आप अपने स्थान को ग्रहण करे, इस आशा के साथ की आगे जब भी हम पूजन करेगे आप सपरिवार हमारी पूजन में आ कर हमें अनुग्रहित करेगे.

गौर गणेश, रिद्धी सिद्धि, शुभ लाभ को छोड़कर सभी देवी देवता अपने अपने स्थान को ग्रहण करे ये प्रार्थना करते हुए कलश के साथ सभी देवी देवताओ पर अक्षत छीट देते है और कलश को हिला देते है .

चूकि इस  कलश में सभी देवी देवताओ का वास रहा है इस कारण सम्मान और श्रद्धा पूर्वक अपने घरों में उस कलश को आगामी एक वर्ष तक रख सकते है या फिर बहते हुए जल में विसर्जित कर दिया जाता है.

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