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किसान के बेटे ने तय किया डीएम तक का सफर : लोहरदगा उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री से Lens Eye की विशेष भेटवार्ता

16-Lohardagaलोहरदगा, झारखंड 16 मार्च 2015 :: लोहरदगा के उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री भारतीय प्रशासनिक सेवा के उन अधिकारियों में से हैं, जिन्होंने अपनी कर्त्तव्य परायणता व कुशल नेतृत्व के बल पर सरकार व प्रशासनिक महकमें में ही नहीं, अपितु लोहरदगा के नागरिकों के बीच भी अपनी विशिष्ट पहचान बनायी है। वर्ष 2011 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा में झारखंड कैडर के रूप में चयनोपरांत प्रशिक्षण से लेकर अब तक राज्य के विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर रहकर उल्लेखनीय कार्य करते हुए डीएम तक पहुंचने में कामयाबी हासिल की है। विगत 13 फरवरी 2015  को लोहरदगा जिले के 36वें उपायुक्त के रूप में पदभार ग्रहण करने के बाद जिले के विभिन्न समस्याओं को दूर करने के साथ-साथ सरकारी योजनाओं को गति प्रदान करने की ठोस योजना पर कार्य प्रारंभ कर चुके हैं। उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री का मानना है कि जब तक आम जनता के साथ सीधा संवाद स्थापित नहीं होगा, तब तक उनकी किसी भी समस्या का समाधान पूरी तरह से नहीं हो सकता है। सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू करने के लिए विभागीय पदाधिकारियों-कर्मचारियों के साथ-साथ आम जनता का सहयोग भी काफी महत्वपूर्ण है। उपायुक्त श्री भजन्त्री ने लेंस आई के साथ विशेष भेट-वार्ता में कहा कि विकास एक सतत प्रक्रिया है, जो निरंतर चलती रहती है। सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन जब ईमान्दारी से होगा, तभी सुदूरवर्ती ग्रामीण इलाके के गरीबों व समाज के अंतिम पंक्ति के लोगों को इसका फायदा मिलेगा। वे चाहते हैं कि महिला व बुजुर्गों को सम्मान मिले, शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में गुणवत्ता आए। इसके लिए यह भी जरूरी है कि येजनाओं के क्रियान्वयन लगातार हो तथा पारदर्शिता बरती जाए। उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री कहते हैं कि वे मूलत: कर्नाटक के रहने वाले हैं, लेकिन उनकी ट्रेनिंग झारखंड के गुमला जिले में हुई है। वे मुंबई से कंप्यूटर साइंस में आईआईटी की डिग्री हासिल की है। डीसी श्री भजन्त्री ने कहा कि वे इन्फोसिस और रिलायंस जैसे नामीग्रामी कंपनियों में भी अपनी सेवा दे चुके हैं। उक्त कंपनी में अच्छी खासी सेलरी मिलती थी, लेकिन उन कंपनियों में रहकर गरीब व लाचार लोगों की सेवा नहीं कर सकते थे, नौकरी में आने का उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा था। इसलिए कंपनी को छोड़ कर फिर से प्रमियोगिता में जुड़ गए। उन्होंने कहा कि आइएएस अधिकारी बनने से पूर्व वर्ष 2010 में एक वर्षों तक कर्नाटक में आइपीएस अधिकारी भी रहे हैं।
केमेस्ट्री शिक्षक ने 250 रूपए देकर किया मदद
अपने पारिवारिक पृष्ठभूमि के संबंध में उपायुक्त श्री भजन्त्री ने बताया कि वे मूलत: कर्नाटक के बेलगम जिला अंतर्गत सुरेबन ग्राम निवासी हैं। उनके पिताजी श्री हनमंतप्पा भजन्त्री ग्रामीण किसान व माता श्रीमती हनमव्वा भजन्त्री गृहणी हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा-दिक्षा गांव के प्राथमिक विद्यालय में ही हुई। फिर जवाहर नोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा पास कर वहां से 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की। आइआइटी परीक्षा का फार्म भरने के लिए उनके पैसे नहीं थे। उनके केमेस्ट्री शिक्षक ने उन्हें 250 रूपए का मदद कर फार्म भरवा दिया। उन्होंने मुम्बई से आइआइटी कंप्यूटर साइंस एण्ड इंजिनीयरिंग की डिग्री प्रथम श्रेणी से उतीर्ण किये हैं।

Report & Photograph by Quaiyum Khan, Lohardaga, Jharkhand.

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