Lens Eye - News Portal - गोबर से बने उपलो की माला को भाइयों के सिर के ऊपर से सात बार घूमा कर होलिका दहन में डालना शुभ : डॉ सुनील बर्मन [ ज्योतिष शास्त्री ]
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गोबर से बने उपलो की माला को भाइयों के सिर के ऊपर से सात बार घूमा कर होलिका दहन में डालना शुभ : डॉ सुनील बर्मन [ ज्योतिष शास्त्री ]

Lens Eye - News Portal - गोबर से बने उपलो की माला को भाइयों के सिर के ऊपर से सात बार घूमा कर होलिका दहन में डालना शुभ : डॉ सुनील बर्मन [ ज्योतिष शास्त्री ]Lens Eye - News Portal -कलश विसर्जन का महत्वरांची, झारखण्ड 15 मार्च 2014 :: होली, पर्व का पहला दिन होलिका दहन का दिन कहलाता है। इस दिन चौराहों पर व जहाँ कहीं अग्नि के लिए लकड़ी एकत्र की गई होती है, वहाँ होली जलाई जाती है। इसमें लकड़ियाँ और उपले प्रमुख रूप से होते हैं। कई स्थलों पर होलिका में भरभोलिए जलाने की भी परंपरा है। भरभोलिए गाय के गोबर से बने ऐसे उपले होते हैं जिनके बीच में छेद होता है। इस छेद में मूँज की रस्सी डाल कर माला बनाई जाती है। एक माला में सात भरभोलिए होते हैं। ज्योतिष शास्त्री डॉ सुनील बर्मन ( स्वामी दिव्यानंद ) के अनुसार होलिका में आग लगाने से पहले इस माला को भाइयों के सिर के ऊपर से सात बार घूमा कर होलिका दहन में डालना शुभ होता है। रात को होलिका दहन के समय यह माला होलिका के साथ जला कर होलिका कि तीन परिक्रमा करके भस्म को घर लाकर रखना चाहिए, जिससे सुख समृद्धि आती है इसका यह आशय है कि होली के साथ भाइयों पर लगी बुरी नज़र भी जल जाए। इस आग में नई फसल की गेहूँ की बालियों और चने के होले को भी भूना जाता है। होलिका का दहन समाज की समस्त बुराइयों के अंत का प्रतीक है। यह बुराइयों पर अच्छाइयों की विजय का सूचक है। गाँवों में लोग देर रात तक होली के गीत गाते हैं तथा नाचते हैं। इस वर्ष होलिका दहन 16 मार्च 2014 को और होली 17 मार्च 2014 को मनायी जायेगी.

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