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जागरूकता की कमी की वजह से जनता योजनाओं के लाभ से वंचित – हेमंत सोरेन [मुख्यमंत्री, झारखंड ]

Lens Eye - News Portal - जागरूकता की कमी की वजह से जनता योजनाओं के लाभ से वंचित - हेमंत सोरेन [मुख्यमंत्री, झारखंड ]रांची, झारखंड 19 फरवरी 2014 ::  झारखंड में जनता के लिए योजनाओं की कमी नहीं है, जागरूकता की कमी की वजह से जनता योजनाओं के लाभ से वंचित रहते हैं और इसी वजह से योजनाएं दम तोड़ती है। उक्त बातें राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कही। श्री सोरेन बुधवार को रांची के खेलगांव में पैक्स कार्यक्रम के तहत आयोजित जन संवाद कार्यक्रम के दूसरे दिन सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि योजनाओं का लाभ लेने के लिए जनता को जागरूक करने के पैक्स के प्रयास की सराहना करते हुए श्री सोरेन ने कहा कि राज्य की विकास में पैक्स की योगदान काफी महत्वापूर्ण है। राज्य में अनुसूचित जनजातीय आयोग के अबतक गठन नहीं किये जाने से आदिवासियों को हो रही परेशानी को दूर करने की मांग पर मुख्यमंत्री श्री सोरेने ने अगले एक माह के भीतर राज्य में एसटी कमीशन के गठन करने की घोषणा की। उन्होंने इसके लिए पैक्स से सहयोग की अपील भी की। गांवों के विकास को लेकर उन्होंने स्थानीय लोगों को अपने विकास की परिकल्पना करने की आजादी की वकालत करते हुए कहा कि ग्रामीण की गांव को माॅडल बना सकता है, उन्हें सिर्फ अवसर देने की जरूरत है। उन्होंने राज्य के किसी भी व्यक्ति को भूमिहीन नहीं रहने देने की बात एक बार फिर दोहराई। इस अवसर पर पैक्स के राष्ट्रीय निदेशक राजन खोसला ने कहा कि पैक्स राज्य के 12 जिलों में दबे कुचले लोगों को समाज की मुख्यधारा में लाने तथा उनकी नेतृत्व क्षमता को विकसित करने के दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि झारखंड जैसे आदिवासी राज्य में लोगों को उनके हक एवं अधिकार दिलाना पैक्स का मुख्य उद्देश्य है।

 कार्यक्रम के जन उत्सव पर दूसरे दिन वनाधिकार कानून और मनरेगा पर अलग-अलग कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस मौके पर वनाधिकार पर महिला आयोग के पूर्व सदस्य वासवी किडो ने कहा कि झारखंड में जितने भी आंदोलन हुए हैं  वह वनाधिकार के लिए हुए हैं यह आदिवासी ही नहीं बल्कि सभी के लिए हुए हैं. बीडीओ व एफओ को इसकी जानकारी तक नहीं है.

पैक्स के स्अेट मैनेजर जॉनसन टोपनो ने झारखंड में वनाधिकार कानून जरूरी है, इससे आदिवासियों व अन्य संप्रदायों को लाभ होगा. वनाधिकार कानून पर चर्चा की जानी चाहिए. वनधिकार कानून झारखंड के लिए जरूरी एक्ट है. हम इससे अपनी जमीन की रक्षा कर सकते हैं झारखंड में 29 प्रतिशत जंगल है. हमें इसे रक्षा करना होगा. इस मौके पर समुदाय से जुड़ी मांगों को लेकर एक मांग पत्र भी मुख्यमंत्री को सौंपा गया। इस अवसर पर राज्य के 12 जिलों से आये समुदायिक संगठनों के प्रतिनिधियों को स्मृतिचिन्ह प्रदान कर मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया। कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन पैक्स के राज्य प्रबंधक जॉनसन टोपनो ने किया। इस अवसर पर आसरा के सचिव शिवकर पुरती, चेतना विकास के सचिव रंजन, एसएमएस की सचिव पूर्वी पाॅल, शेयर संस्था की सचिव याहिद नसीम सहित कई गैर सरकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं 3000 समुदायिक संगठनों के सदस्य उपस्थित थे।

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