जिस प्रकार केजीवीके मे कार्य हो रहा है, उसी प्रकार हम किसानों तक पहुँच सकते है :: डा. गर्ड मूलर [ आर्थिक विकास एवं सहयोग मंत्री, जर्मनी ]

जिस प्रकार केजीवीके मे कार्य हो रहा है, उसी प्रकार हम किसानों तक पहुँच सकते है :: डा. गर्ड मूलर [ आर्थिक विकास एवं सहयोग मंत्री, जर्मनी ]
रुक्का , झारखण्ड । अक्टूबर । 06, 2015 :: उषा मार्टिन, WHH, GIZ एवं केजीवीके [ Krishi Vikas Gram Vikas Kendra (KGVK) ] के द्वारा ग्रीन काॅलेज अन्र्तगत चलाई जा रही पारावेट, डेयरी उद्यमी एवं उन्नत कृषि के कार्यक्रमों को देखने जर्मनी के आर्थिक सहयोग एवं विकास मंत्री डा. गर्ड मूलर [ Dr. Gerd Muller ] अपने सहयोगियों के साथ केजीवीके, रूक्का पहुँचे। केजीवीके में डा. गर्ड मूलर की अगवानी रंधीर कुमार सिंह, कृषि मंत्री, झारखण्ड सरकार, बसन्त कुमार झावर, चैयरमेन, केजीवीके, डा. नितिन मदन कुलकर्णी, सचिव कृषि विभाग एवं केजीवीके बोर्ड के सदस्य यजदी पी करई ने किया।

डा. मूलर ने केजीवीके के द्वारा ग्रामीणों के विकास हेतु चलाये जा रहे विभिन्न कार्यो का अवलोकन किया।

केजीवीके के उपाध्यक्ष वृजकिशोर झावर ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि “केजीवीके के लिए यह एक गौरव की बात है आज केजीवीके एवं जर्मनी के सहयोग से झारखण्ड के युवाओं एवं कृषकों मे विभिन्न कौशल कार्यक्रमों के द्वारा आर्थिक उन्नति के अवसर उत्पन्न हो रहे हैं।”06-KGVK-02इसके पश्चात् मुख्य अतिथि डा. गर्ड मूलर ने सरकार, निजी क्षेत्र और सिविल सोसाइटी के बीच पार्टनरशिप पर जोर देते हुए कहा कि, “जिस प्रकार केजीवीके मे कार्य हो रहा है उसी प्रकार हम किसानों तक पहुँच सकते है और युवाओं को रोजगार का अवसर प्रदान कर सकते है। उन्होनें अपने बारे मे कहा कि वे स्वयं एक डेयरी कृषक के पुत्र है तथा इस क्षेत्र में उन्हें विशेष अनुभव है।”

तत्पश्चात उन्होने जर्मनी सरकार के सहयोग से चलाए जा रहे ग्रीन काॅलेज अन्र्तगत पशु स्वास्थ्य कार्यकर्ता के सफल प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किया।

कार्यक्रम मे रणधीर कुमार सिंह कृषि मंत्री झारखण्ड सरकार ने केजीवीके के सम्र्पूण ग्राम प्रबंधन माॅडल की प्रशंसा करते हुए कहा कि, “वर्तमान परिप्रेक्ष्य में झारखण्ड राज्य जहाॅ के किसान वर्षा आश्रीत कृषि करते है एवं ऐसे मे पशुपालन का महत्व काफी बढ़ जाता है। उन्होन केजीवीके द्वारा ग्रीन काॅलेज के अन्र्तगत चलाए जा रहे पाठ्यक्रमों जैसे पशु स्वास्थ्य कार्यकर्ता, डेयरी उद्यमी एवं उन्नत कृषि के द्वारा ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार सृजन मे लाभदायक बताया। उन्होनें जर्मनी सरकार से झारखण्ड के विकास में उनकी भागीदारी की अपेक्षा की।”

कार्यक्रम के समापन सत्र में केजीवीके के अध्यक्ष बसन्त कुमार झावर ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि, “कौशल एवं ज्ञान ऐसी वस्तु हैं जिसे न कोई चुरा सकता है, न कोई सत्ता इसे छीन सकती है न तो इसे आप अपने भाइयों रिश्तेदारों मे बाँट सकते और यह सभी धनों से सर्वेश्रेष्ठ हैं। उन्होनें कहा कि ग्रीन काॅलेज परियोजना इसी दिशा में एक पहल है जो उक्त अवधारणा पर आधारित है। उन्होने कहा कि आज हमारे देश में विश्व का सबसे ज्यादा युवा वर्ग निवास करता है । अगर वे ज्ञान एवं कौशल से लैस हो तभी अपने लिए सुनहरे भविष्य का निर्माण कर सकते है।”

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