तीन सालों में 1884 योजनाओं को वन-पर्यावरण मंत्रालय की स्वीकृति
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तीन सालों में 1884 योजनाओं को वन-पर्यावरण मंत्रालय की स्वीकृति

तीन सालों में 1884 योजनाओं को वन-पर्यावरण मंत्रालय की स्वीकृति रांची, 5 दिसम्बर 2014 :: पिछले तीन सालों में विभिन्न क्षेत्रों की 1884 परियोजनाओं को पर्यावरणीय स्वीकृति दी गई। पर्यावरणीय स्वीकृति प्रदान करने में विलंब से देश में कुल मिलाकर 329 योजनाएं रूकी हुई है। देश की अन्य 138 योजनाओं को वन मंत्रालय की स्वीकृति की प्रतिक्षा है। इनमेें से अधिकतम 33 योजनाएं तमिलनाडु में पर्यावरणीय स्वीकृति की वजह से रूकी हुई है। गुजरात में रूकी हुई योजनाओं की संख्या 14 और झारखंड में 20 है। राज्यसभा सांसद  परिमल नथवाणी के प्रश्न के प्रत्युत्तर में वन-पर्यावरण एवम् जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  प्रकाश जावडेकर ने राज्यसभा में दिसम्बर 4, 2014 को यह जानकारी दी।

 तीन सालों में 1884 योजनाओं को वन-पर्यावरण मंत्रालय की स्वीकृतिश्री नथवाणी ने विभिन्न राज्यों से वन एवम् पर्यावरण मंत्रालय की स्वीकृति के लिए प्राप्त हुए प्रस्तावों मंत्रालय में स्थगित प्रस्तावों और उनके विलम्ब के कारण एवम् त्वरित निवारण के उपाय के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमोें के बारे में जानकारी मांग की थी।
पिछले तीन सालों में गुजरात की अधिकतम 256 योजनाओं को पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त हुई है। इसके बाद आंध्र प्रदेश की 210 योजनाओं का समावेश है। झारखंड में 125 योजनाओं को स्वीकृति मिली है, ऐसा भी श्री जावेडकर ने बताया।

इस संदर्भ में सदन में प्रस्तुत विवरण के अनुसार कुल 329 योजनाएं पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रतीक्षा मे हैं जिनमें 93 उद्योग- II, 86 योजनाएं गैर-कोयला खनन क्षेत्र और कोयला खनन एवम् उद्योग क्षेत्र में से प्रत्येक में से 48 का समावेश है। 29 नदी-घाटी और जल-विद्युत योजनाएं भी विलम्बित है। ये विशेष रूप से अरूणाचल प्रदेश व हिमाचल प्रदेश से हैं।

प्रत्युत्तर में मंत्रीजी ने यह भी बताया कि 138 योजनाएं वन विभाग की स्वीकृति की प्रतीक्षा में हैं। इसमें अधिकतम 58 योजनाएं खनन क्षेत्र से हैं जबकि 50 योजनाएं बुनियादी अवसंरचना क्षेत्र से हैं। वन विभाग की स्वीकृति की प्रतीक्षारत योजनाओं में से अधिकतम 26 योजनाएं मध्य प्रदेश से है।

स्वीकृति की गति तेज करने के प्रयासों को दर्शाते हुए मंत्रीजी ने बताया कि निश्चित मार्ग रेखा एवम् सूचनाओं के अतिरिक्त वन विभाग की स्वीकृति के प्रस्ताव की आॅन-लाईन प्रस्तुति एवम् निगरानी के लिए वेब पोर्टल शुरू किया गया है।

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