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दुनियाभर के निर्धन और जरूरतमंदों की आवाज बने मीडिया : संजय राठी [ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स ]

Lens Eye - News Portalनई दिल्ली, मई 03, 2015 ::  नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संजय राठी ने विश्व प्रैस स्वतन्त्रता दिवस पर सभी मीडियाकर्मियों को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में मीडिया ही अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता तथा मानवाधिकारों को सुरक्षित रखने के लिये कटिबद्ध है। लेकिन बाजारवाद एवं मुनाफाखोरी की बढ़ती प्रवृत्तियां मीडिया के लिये सर्वाधिक कठिन चुनौतियां हैं जिसकगा सीधा प्रभाव जनपक्षीय पत्रकारिता पर पड़ता है।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संजय राठी ने कहा कि दुनियाभर में अशिक्षा और गरीबी उन्मूलन के बिना स्वतन्त्रता के कोई मायने नहीं हैं। अभावग्रस्त लोगों में चेतना और सगठन का अभाव हैँ जिसके कारण उनका शोषण आसानी से हो पा रहा है। शासन, प्रशासन और न्यायिक व्यवस्था के माध्यम से अशिक्षित व निर्धन व्यक्ति अपने अधिकार नहीं पा सकता। ऐसे ही दुनियाभर के निर्धन और जरूरतमंदों की आवाज बनने का मीडिया संकल्प ले भी पीडित मानवता का हित सम्भव है।
वरिष्ठ पत्रकार संजय राठी ने कहा कि अधिकांश देशों में मीडियाकर्मियों का भी शोषण हो रहा है। विशेषकर एशियाई देशों में ठेका प्रथा तेजी से बढ़ी है। जिसका सीधा प्रभाव मीडिया की स्वतन्त्रता एवं जनपक्षीय पत्रकारिता प दृष्टिगोचर हो रहा है। अधिकतर मीडिया हाऊसों पर कारपोरेट घरानों और राजनेताओं का कब्जा है। जो अपने निजी एवं व्यावसायिक हितों की रक्षा के लिये मीडिया का दुरूपयोग कर रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में पेड न्यूज का प्रचलन तेजी से बढ़ा है। जिसके चलते मीडिया की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्र चिह्न लग गया है।
एन.यू.जे. के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संजय राठी ने आगे कहाकि दुनिया के कई आतंक एवं अलगाव ग्रस्त देशों में मीडियाकर्मियों पर हमले हो रहे हैं। जिनमें अनेक मीडियाकर्मियों को अपनी जानें गंवानी पड़ी हैं। दक्षिणी एशिया में अफगानिस्तान और पाकिस्तान में मीडियार्मियों के साथ सर्वाधिक हिंसक घटनाएं हुई। जिनमें अनेक पत्रकारों की जानें गयी हैं। भारत में भी मीडियाकर्मी आतंकवादियों, अलगाववादियों तथा असामाजिक तत्वों के निशाने पर हैं।
संजय राठी ने कहा कि पत्रकारिता में साहस, ईमानदारी, निष्पक्षता एवं सुचिता की आवश्यकता है ताकि समाज के शोषित, पीडित, अभावग्रस्त एवं मेहनतकशों को उनके अधिकार मिल सकें इसके साथ ही समाज में फैली कुरीतियों जैसे पर्दा प्रथा, दहेज प्रथा तथा अन्धविश्वास के खिलाफ जागरूकता पैदा कर सकता है।

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष

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