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देश के लगभग 55,669 गांवों में अभी तक मोबाइल कवरेज नहीं :: 10,398 गांवों के साथ उडि़सा पहले स्थान पर

24-Mobile-Networkझारखण्ड | जुलाई 24, 2015 :: देश के लगभग 55,669 गांवों में अभी तक मोबाइल कवरेज नहीं है। झारखण्ड राज्य में 5949 गांवों में मोबाइल सुविधा उपलब्ध नही है ।केन्द्रीय संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आज राज्यसभा में सांसद परिमल नथवाणी के प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी।
Parimal-Nathwaniश्री परिमल नथवाणी सुशासन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार द्वारा उठाये गये कदम और इसके लिए सूचना प्रौद्योगिकी उत्पादों और प्रौद्योगिकियों के प्रयोग के बारे में जानना चाहते थे। सदन में प्रस्तुत निवेदन के अनुसार, देश में मोबाइल सेवा में शामिल नहीं किए गए गांवों की संख्या के मामले में झारखण्ड दूसरे स्थान पर है, जबकि उडि़सा 10,398 गांवों के साथ पहले स्थान पर है।
मंत्री जी ने बताया कि मोबाइल सेवा में शामिल नहीं किए गए शेष गांवों को पांच साल में चरणबद्ध ढंग से मोबाइल कवरेज प्रदान करने का प्रस्ताव है। श्री रवि शंकर प्रसाद ने यह भी बताया कि भारत को डिजिटल रूप से एक सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था के रूप में परिवर्तित करने के विजन के साथ भारत सरकार डिजिटल इंडिया कार्यक्रम कार्यान्वित कर रही है।
इस कार्यक्रम का फोकस क्लाउड, मोबाइल प्लेटफाॅर्म जैसी नवीनतम प्रौद्योगिकियो ंको शुरू करके ई-शासन सेवाओं का कायाकल्प करने पर है, ऐसा उन्होने बताया। मंत्रीजी ने यह भी बताया कि विभिन्न राज्यों/संघ राज्यों में वर्तमान में जहां राज्यव्यापी क्षेत्र नेटवर्क (स्वान) परियोजना का उन्नयन किया जा रहा है, वहां सुरक्षा के लिए नवीनतम प्रौद्योगिकियों जैसे आइपीवी, एमपीएलएस, सुरक्षा के लिए आईपी एसईसीऔर 4जी एलटीई अनुकूल प्रौद्योगिकियों के कार्यान्वयन पर विचार करने का प्रस्ताव किया गया है।
मंत्री जी ने आगे बताया कि राष्ट्रीय आॅप्टिकल फाइबर नेटवर्क (एनओएफएन) परियोजना की योजना के माध्यम से ब्राडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान करके ग्राम पंचायतों और ब्लाकों के बीच कनेक्टिविटी अन्तर दूर करने के लिए आॅप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) के जरिए देश में सभी 2.5 लाख ग्राम पंचायतों को कम से कम 100 एमबीपीएस बैंडविथ उपलब्ध कराया जाएगा।
श्री प्रसाद ने कहा कि एनओएफएन के त्वरीत कार्यान्वयन की दिशा मे ंरणनीति और पहल की समीक्षा के प्रयोजन से भारत सरकार ने 14 जनवरी 2015 को एक समिति का गठन िकया था जिसने 31 मार्च 2015 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की है। समिति ने सिफारिश की है कि एनओएफएन परियोजना का नाम बदलकर भारत नेटनाम रखा जाए ताकि राज्यों और िनजी क्षेत्रों की भागीदारी से डिजिटल इंडिया के विजन को मूर्त रूप दिया जा सके, ऐसा भी मंत्री जी ने बताया।

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