नाटक "आवांछित" का मंचन
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नाटक “आवांछित” का मंचन

नाटक "आवांछित" का मंचनरांची, झारखण्ड | जुलाई 05, 2015 :: प्रतिकूल वातावरण से आदमी अपने अंदर घुटन महसूस करता है जिसे नहीं झेल पाने की वजह से उसका दिमागी संतुलन बिगड़ जाता है और आदमी पागल हो जाता है ऐसे में वातावरण को बदलना चाहिए उसे अनुकूल बनाना चाहिए या आदमी को ही पागलखाने की अँधेरी कोठरी में डाल देना चाहिए जैसे प्रश्न के साथ नाटक “आवांछित” का सफल मंचन कांति कृष्ण कलाभवन गोरखनाथ लेन रांची में संपन्न हुआ।
नाटक में एक नेता अपने इलाके को सुखा ग्रस्त घोषित करवाता है ताकि उसे लाभ हो सके जिसका विरोध उसका बेटा करता है जिसे नेता पागल करार कर पागलखाने भेज देता है ।
इस नाटक के नाटककार अशोक पागल एवं निर्देशक ऋषिकेश लाल है
इस नाटक में युवक की भूमिका सौरभ समीर डॉ की भूमिका सुदीप सिन्हा माँ की भूमिका मधु गुंजन, पिता की भूमिका ऋषिकेश लाल ने निभाई तथा मंच संचालन सूरज खन्ना ने किया।

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