नाटक "और पुल टूट गया" का मंचन
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नाटक “और पुल टूट गया” का मंचन

नाटक "और पुल टूट गया" का मंचनरांची, झारखण्ड | जुलाई 12, 2015 :: स्त्री प्रेम और त्याग ही नहीं शक्ति का भी रूप है यह दर्शाता है नाटक “और पुल टूट गया” जिसका मंचन युवा नाट्य संगीत अकादमी रांची के कलाकारों ने बखूबी निभाया। नाटक के नाटककार अशोक पागल एवं निर्देशक ऋषिकेश लाल थे।
“और पुल टूट गया” की कहानी शुरू होती है निर्मला के अतीत से जिसमे निर्मला अपने पसंद के व्यक्ति प्रकाश से विवाह करती है जो सरकारी ठेका ले निर्माण कार्य करता है जिसकी व्यस्तता इतनी रहती है की विवाह की रात भी वह पत्नी के साथ नहीं रह पता और सरकारी इंजिनियर आनंद बाबू जो पुल का निर्माण का कार्य प्रकाश को देता है वह उसके बदले उसकी पत्नी को हम बिस्तर होने का प्रस्ताव देता है जिसे प्रकाश स्वीकार कर अपनी पत्नी निर्मला को आनंद बाबू के पास भेजना चाहता है जिसका विरोध निर्मला करती है और उसका प्रतिकार कर अपने पति को त्याग देती है।
नाटक में निर्मला की भूमिका अनुराधा कुमारी, माँ मधु गुंजन, प्रकाश सौरभ समीर एवं आनंद बाबू की भूमिका सनी शर्मा ने निभाई।

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