नैतिक मूल्यों से राष्ट्र का समुचित विकास संभव : राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी

नैतिक मूल्यों से राष्ट्र का समुचित विकास संभव : राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जीनई दिल्ली, 16 जून, 2014 :: नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों से ही राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव है। राष्ट्र तभी उत्थान के पथ पर अग्रसर होता है जब भौतिक विकास के साथ-साथ आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों का विकास होता है। ये विचार महामहिम राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने आचार्य श्री महाश्रमण जी के शिष्य मुनिश्री राकेश कुमार जी के साथ आचार्य तुलसी जन्म शताब्दी एवं आचार्य महाश्रमण के दिल्ली चातुर्मास के संदर्भ में चर्चा करते हुए व्यक्त की।

इस अवसर पर मुनि राकेश कुमारजी ने उन्हें तुलसी जन्म शताब्दी के अवसर पर हो रहे आयोजनों व कार्यों की अवगति दी। महान समाज सुधारक आचार्यश्री महाश्रमण के व्यक्तित्व एवं कर्तृत्व पर आधारित ग्रन्थ ‘‘जय-जय ज्योतिचरण’’ भी राष्ट्रपति को भेंट किया गया।   इस प्रतिनिधि मण्डल में मुनिश्री सुधाकर, मुनि दीपकुमार, के.एल. जैन, शांति कुमार जैन, टी.के. जैन, संपत नाहटा उपस्थित थे।

Photograph & Content by Seema Thakur & Arpit Gupta