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पशुपालन झारखण्ड की लाईफलाईन :: रघुवर दास [ मुख्यमंत्री, झारखण्ड ]

06-Raghubar-01राँची, झारखण्ड | जुलाई 06, 2015 :: पशुपालन झारखण्ड की लाईफलाईन है । किसान सिर्फ खेती पर भरोसा न करें बल्कि पशुपालन, मछली पालन, मुर्गी पालन, बकरी पालन, सुकर पालन को खेती के साथ अपना कर आर्थिक रूप से स्वाबलम्बी बनें। झारखण्ड में श्वेत क्रांति होगी, झारखण्ड राज्य को राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम के अन्तर्गत शामिल करने हेतु प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति झारखण्ड के सवा तीन करोड़ लोगों की तरफ से आभार। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने आज स्थानीय होटवार के खेल-गाँव में दुग्ध उत्पादकों के सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए घोषणा की कि सरकार पांच हेक्टेयर से कम भूमि वाले छोटे किसानों, भूमिहीनों, मनरेगा मजदूरों, डेयरी कृषकों तथा शहरी क्षेत्र के रिक्शा चालकों, ठेला भेंडरों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय सुरक्षा बीमा योजना का लाभ उपलब्ध कराएगी। डाॅ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को नमनः करते हुए उन्होंने कहा कि वार्षिक प्रीमियम राशि का वहन राज्य सरकार करेगी।

     मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के प्रत्येक परिवार को पालतू पशु उपलब्ध करा कर उन्हें स्वाबलम्बी बनाना है। गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर करने वालों को सरकार दो-दो गाय उपलब्ध कराएगी। दुग्ध उत्पादन से चहुंमुखी विकास सम्भव है। सरकार अनुदान के आधार पर सभी कोटि के डेयरी कृषकों को पांच-दस और बीस की संख्या में गाय उपलब्ध करा रही है। उन्होंने कहा कि जिस राज्य में इतनी बड़ी संख्या में महिलाएं डेयरी से जुड़ी हों, वहां विकास की राह आसान है। महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को डेयरी उद्योग से जोड़ने के लिए राज्य सरकार प्रयासरत है। युवाओं से उन्होंने कहा कि वे डेयरी को अपना कर अपने आर्थिक संसाधनों में वृद्धि करें। दुग्ध उत्पादक सुषमा लकड़ा का उदाहरण देते हुए उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे अपने आस-पास के महिलाओं को भी डेयरी से जुड़ने के लिए प्रेरित करें। श्रीमती सुषमा लकड़ा 12 गायों से हुई आमदनी से अपने तीन बच्चों को इंजीनियर बना चुकी है। श्रीमती लकड़ा के बच्चे भी मां की इस मेहनत के इतने कायल हैं कि उनकी गुजारिश है कि वे गोपालन को न छोड़ें। वे पहले हडि़या-दारू बेच कर अपना परिवार चलाती थी।

उन्होंने कहा कि सरकार पारदर्शी प्रशासन व्यवस्था के लिए कटिबद्ध है। डेयरी क्षेत्र में भी बिचैलियों को बरदाश्त नहीं किया जाएगा। यदि किसी भी दुग्ध उत्पादक को बिचैलिया या निजी खरीदार धमकी दे तो सीधे मुख्यमंत्री डेस्क को टाॅल फ्री नम्बर 181 पर सूचित करें। सरकार बीस पशु हाॅस्टल बनाने जा रही है। पशु चिकित्सकों को आखिरी चेतावनी दी गई है कि वे अपने पदस्थापन स्थल पर डेयरी किसानों की मदद के लिए तत्पर रहें। जो पशु चिकित्सक पशुओं का इलाज करने जाएंगे उन्हें संबंधित डेयरी किसान से प्रमाण पत्र लिखवाना होगा। गाय हमारी माता है और गौ हत्या भी बर्दाश्त नही की जाएगी। उन्होंने कहा कि पशुपालन विभाग बेहतर पशु स्वास्थ्य के लिए आरोग्य मेला आयोजित करेगा। दुग्ध उत्पादन में वृद्धि से राज्य को कुपोषण मुक्त बनाने में आसानी होगी। उन्होंने दुग्ध उत्पादकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि अपने आस-पड़ोस को स्वच्छ रखें आपकी उपस्थिति से यह आत्मविश्वास बढ़ा है कि वर्ष 2019 तक दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में राज्य आत्मनिर्भर होगा जिसका सकारात्मक असर राज्य की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

           सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए कृषि एवं पशुपालन मंत्री रणधीर कुमार सिंह ने कहा कि राज्य में तीन लाख लीटर अतिरिक्त दुग्ध क्षमता का सृजन किया जाना है। कोडरमा, पलामू एवं देवघर में बीस हजार लीटर क्षमता एवं जमशेदपुर में तीस हजार लीटर क्षमता का मिल्क प्लांट लगेगा। आने वाले दिनों में राज्य में श्वेत क्रान्ति के आगाज का आहवान् करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार डेयरी किसानों का कौशल विकसित करेगी। राज्य में 450 कम्प्यूटराईज्ड मिल्क कलेक्शन सेंटर के साथ-साथ किसानों के सबलीकरण के वास्ते 89 बल्क मिल्क कलेक्शन सेंटर स्थापित करेगी।

   राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के अध्यक्ष टी. नंदकुमार ने दुग्ध उत्पादकों से कहा कि झारखण्ड मिल्क फेडरेशन आपका है अभी एन.डी.डी.बी. इसे चला रही है। सुधा को भी 13 साल पहले एन.डी.डी.बी. ने शुरू किया था। अभी राज्य के नौ जिलों में 42 से 45 हजार लिटर दुग्ध का उत्पादन हो रहा है। आगामी दिसम्बर में होटवार का मिल्क प्लांट चालू हो जाएगा। आने वाले चार वर्षों में 45 सौ से पांच हजार गांवों में मिल्क कमिटि गठित किये जाने की योजना है। पशुओं के लिए संतुलित आहार को आवश्यक बताते हुए उन्होंने कहा कि बीस लाख दुधारू पशुओं पर आजमा कर यह निष्कर्ष आया है कि संतुलित आहार से प्रति दिन तीन सौ से पांच सौ एमएल दुग्ध बढ़ता है साथ ही तीन से पांच रूपये प्रति पशु की बचत भी होती है। प्रत्येक जिले में सर्वश्रेष्ठ महिला डेयरी कृषक को पांच हजार एवं दस हजार रूपये का मेघा-लक्ष्मी पुरस्कार फेडरेशन की ओर से दिया जाएगा। दुग्ध उत्पादक दुग्ध को लाने में प्लास्टिक केन का प्रयोग नहीं करें इसके लिए उन्हें स्टील केन उपलब्ध कराये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि फेडरेशन को उपभोक्ताओं का विश्वास जितना है इसके लिए दुग्ध प्राप्ति एवं परिवहन में शुद्धता एवं पारदर्शिता होनी चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि अगले चार वर्षों में दुग्ध के जरिये राज्य में ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सुदृढ़ीकरण होगा।

सम्मेलन में राज्य भर से आये डेयरी कृषकों ने इस अवसर पर अपने अनुभवों को साझा करते हुए अपनी समस्याएं बतायीं एवं अपने सुझाव भी दिये।

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