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प्रेस कौंसिल ऑफ इंडिया में नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स की ओर से सम्भावित नामों पर चर्चा कर अन्तिम निर्णय के लिये यूनियन का शीर्ष नेतृत्व शीघ्र ही निर्णय लेगा

नई दिल्ली, 25 मई 2014 ::  प्रेस कौंसिल ऑफ इंडिया में नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स की ओर से सम्भावित नामों पर चर्चा कर अन्तिम निर्णय के लिये यूनियन का शीर्ष नेतृत्व शीघ्र ही निर्णय लेगा। एन.यू.जे. की भागेदारी बढवाने के लिए भी उच्च स्तर पर कूटनीतिक प्रयास और लॉबिंग शुरू हो गयी है।
उक्त जानकारी देते हुए नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संजय राठी ने कहा कि पत्रकारों की शीर्ष संस्था में कुशल संघर्षशील एवं सक्षम व्यक्ति की आवश्यकता है ताकि मीडियाकर्मियों का पक्ष मजबूती से प्रेस
काऊंसिल में रखा जा सके। अनुभवहीन, निष्प्रभावी एवं नकारा प्रतिनिधियों के कारण पत्रकार आन्दोलनों की धार कुन्द हो गयी है। पूरे देश में पेड़ न्यूज एवं ठेका प्रथा के चलते पत्रकार भयानक शोषण का शिकार है।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संजय राठी ने कहा कि मुनाफाखोरी की प्रवृति और पूंजीवादी दबावों के चलते पत्रकारिता की विश्वसनीयता घटी है। पत्रकार संगठनों की स्थिति भी सन्तोषजनक नहीं है। पूरे देश में ट्रेड यूनियनों की भूमिका उतनी प्रभावी नहीं रह गयी है। ठेका प्रथा के चलते जनपक्षीय पत्रकारिता मुश्किल होती जा रही है। दूसरी ओर वेज बोर्ड की सिफारिशों के अनुसार अधिकांश मीडिया संस्थान वेतनमान नहीं दे रहे हैं। जोकि अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण एवं शर्मनाक स्थित है।

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