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फोटोग्राफी कल्पना और तकनीक का मिलाप है : कुलदीप सिंह दीपक

१९ अगस्त १८३९ को आरागो नामक व्यक्ति ने फ्रेंच एकेडमिक डेस साइंस व्यूक्स आर्ट्स के द्वारा डैगरो नामक व्यक्ति की फोटोग्राफी के सिद्धांत और प्रक्रिया को प्रस्तुत किया | फ़्रांस सरकार ने १९ अगस्त को इस थ्योरी की प्रति प्रस्तुत की | इस प्रति में फोटोग्राफी के, विकास और उसके उज्जवल भविष्य की उम्मीद की गयी थी | फ़्रांस सरकार के द्वारा इस प्रति को आमलोगों के बीच नि:शुल्क  उपलब्ध
कराया गया, ताकि फोटोग्राफी को पहचान मिल सके | इसलिए इस दिन को विश्व फोटोग्राफी दिवस के रूप में मनाया जाता है |

फोटोग्राफी तकनीक और कल्पना का मिलाप है | तकनीक के माध्यम से हम छवि उतारते हैं और कल्पना के पंख लगाकर उसे मनोरम बनाते हैं | यही कारण है – एक ही विषय को विभिन्न फोटोग्राफर विविध अंदाज में देखते हैं |  उनकी प्रस्तुति भी एक दूसरे से भिन्न होती है | तकनीक के कठोर धरातल को कल्पना सौदर्य दृष्टी के  सहारे कोमल स्वरुप प्रदान करती है | कैमरा, तकनीक के बल पर बच्चे को अपने पटल पर उतारता है | किंतु कल्पना उसके मुख मंडल में मुस्कान की सुगंध बिखेर फोटो को अविस्मरनीय बना देती है | इस तरह तकनीक और कल्पना फोटो को सुन्दरता प्रदान करते हैं | सुन्दर फोटोग्राफी में कम्पोगीशन है | कम्पोगीशन फोटो के प्राण हैं | भाव – अभिवयक्ति के बिना कोई भी चित्र पूर्ण नहीं होता है | बच्चे की खिलखिलाहट, भिछुक की वेदना, नारी की आँखों की हया पुलिसिया रुआब, माँ की ममता, बहन का स्नेह आदि ऐसे भाव हैं जो छवि में चार चाँद लगा देते हैं | फोटो में डिटेल्स का महत्वपूर्ण स्थान है | फोटो के THREE DIMENSION EFFECT (त्रिआयामी प्रभाव ) जो कि बिलकुल सही एक्सपोजर और फोटो कि सही धुलाई से ही मिल सकते है | प्रकाश व्यवस्था का भी प्रभाव, फोटोग्राफी के लिए महत्वपूर्ण योगदान है | सीधे प्रकाश से फोटो फ्लेट हो जाते है | शेड एंड लाइट मिलकर फोटो को कमनीयता प्रदान करते हैं | BACKLIGHT  देकर फोटो में उभार पैदा किया जा सकता है | भूत प्रकाश अर्थात विषय वस्तु के नीचे से प्रकाश देकर विकृति पैदा कि जा सकती है | ऐसी प्रकाश व्यवस्था द्वारा डरावनी सूरत उभार कर आती है | इस प्रकार विभिन्न प्रकाश स्रोतों द्वारा विभिन्न प्रभाव उत्त्पन्न किए जा सकते हैं | सही क्षणों का सही समय पर उपयोग कर फोटो को महत्वपूर्ण बनाया जा सकता है | आप किसी उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि द्वारा फीता काटने का दृश्य उतार रहे हैं  लेकिन फीता कट जाने के बाद आप फोटो उतारतें हैं तो वह फोट महत्वहीन होगा | माला पहनाकर स्वागत करते समय यदि आप फोटो उतार रहे हैं लेकिन माला पहनाने के पहले या बाद में छायांकन होता है तो वह फोटो अर्थहीन है | फूटबाल के खेल में गोल दागते हुए खिलाडी का सही समय पर फोटो उतरने में आप सफल होते हैं तो वह सफल फोटो कहलाएगा | इसी प्रकार महत्पूर्ण क्षणों को सही समय पर कैद करना ही सही फोटोग्राफी है, क्योंकि समय कि पकड़ महत्वपूर्ण है | इन सारे तथ्यों को ध्यान में रखकर उतारी गयी तस्वीरें ही सही मायने में श्रेष्ट फोटोग्राफी है |

प्रस्तुती : कुलदीप सिंह दीपक (वरिष्ट फोटोग्राफर )

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