Raghuvar Das
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राजस्व राज्य की अर्थव्यवस्था का आधार :: रघुवर दास [ मुख्यमंत्री, झारखण्ड ]

Raghuvar Dasरांची, झारखण्ड | जुलाई | शुक्रवार | 31, 2015 ::  झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि राजस्व राज्य की अर्थव्यवस्था का आधार है। अतएव राजस्व संग्रहण से जुड़े विभागों के पदाधिकारीगण अपने-अपने निर्धारित राजस्व संग्रहण के लक्ष्य को समय पर प्राप्ति हेतु समयबद्ध रूप से कार्य करें। उन्होंने पड़ोसी राज्यों के वाणिज्य कर पैटर्न के अध्ययन का निदेश देते हुए कहा कि बड़े कर वंचकों की विभागवार एवं जिलावार सूची तैयार कर समयबद्ध रूप से कारवाई करें। उन्होंने पूरे राज्य में लम्बित सर्टिफिकेट केसों के निष्पादन हेतु टाईमलाईन निर्धारित करने का निदेश देते हुए कहा कि कर देने वालों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो इसका ख्याल रखें तथा प्रक्रिया को सरल बनायें। वे आज प्रोजेक्ट भवन स्थित अपने सभा कक्ष में सूबे के वरीय पदाधिकारियों के साथ राज्य के राजस्व संग्रह की समीक्षा कर रहे थे।

   मुख्यमंत्री श्री दास ने करवंचना एवं बिचैलियों की भूमिका को समाप्त करने के लिए अंर्तविभागीय समन्वयन पर बल देते हुए कहा कि राज्य का राजस्व संग्रहण राज्य के बजट के मुताबिक होना चाहिए। उन्होंने माननीय सर्वोच्च न्यायालय,उच्च न्यायालय एवं अन्य न्यायालयों अथवा ट्रीब्यूनलों में कराधान से संबंधित सभी लम्बित मामलों के निष्पादन की स्थिति से अवगत होते हुए विभागवार लम्बित चले आ रहे दीवानी मामलों की समीक्षा कर आवश्यक कारवाई करने का निदेष दिया। कराधान से संबंधित लम्बित मामलों के कारण बड़ी-बड़ी सरकारी राशियों की वसूली विचाराधीन है। ऐसे मामलों की नियमित माॅनीटरिंग होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य के चेकपोस्टों पर शीघ इलेक्ट्राॅनिक वे-ब्रीज बनवाएं। राज्य सरकार वे-ब्रीजों पर निरंतर पेट्रोलिंग करा रही है। चेकपोस्टों पर सुरक्षा व्यवस्था को भी दुरूस्त किया जा रहा है। डिफाॅल्टर कर्जदारों से बकाये की वसूली हेतु कार्रवाई करें एवं डेफर्ड टैक्स के बकायेदारों को टैक्स जमा करने के लिए नोटिस दें। उन्होंने कहा कि बकाया कर प्राप्ति हेतु विशेष कैंप आयोजित किये जाएं। उन्होंने निदेशित किया कि ई-काॅमर्स के कारण भी स्थानीय कराधान में ह्रास हो रहा है। अतएव ई-काॅमर्स के सभी अवयवों का अध्ययन कर कराधान की संभावनाओं का प्रस्ताव दिया जाए।

       उन्होंने कहा कि त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में हरेक स्तर पर पंचायतों ध्स्थानीय निकायों को राजस्व संग्रहण का अधिकार प्राप्त है। परन्तु जनप्रतिनिधियों को जानकारी न रहने के कारण राजस्व वसूली का काम नही हो पाता है। अतः पूरे राज्य में विकेन्द्रीकृत रूप से उनके राजस्व संग्रहण के लिए एक-एक महीने का प्रशिक्षण सत्र चलाया जाए। भूमि निबंधन शुल्क के अंर्तगत नगद शुल्क की व्यवस्था को समाप्त करने का आदेश देते हुए उन्होंने कहा कि नगद पैसों के बदले अब रजिस्ट्री कराने वालों को निकटतम बैंक में विहित नगद राशि जमा करा कर अभिलेखों के साथ जमा की गई राशि के चालान को संलग्न कराने की व्यवस्था करवाएं।

बैठक के प्रारम्भ में प्रधान सचिव, योजना-सह-वित्त विभाग श्री अमित खरे द्वारा जानकारी दी गयी कि विगत वित्तीय वर्ष में जुलाई, 2014 तक 3216.86 करोड़ का राजस्व संग्रहण हुआ था जबकि इस वित्तीय वर्ष में दिनांक 29.07.2015 तक 3573.41 करोड़ की राशि प्राप्त हो चुकी है। माननीय मुख्यमंत्री द्वारा निदेश दिया गया है कि हालांकि विगत वर्ष से राजस्व संग्रहण में सुधार हुआ है किन्तु सभी विभागों को राजस्व वृद्धि हेतु और अधिक प्रयास करना चाहिए।

 उक्त बैठक में मुख्य सचिव राजीव गौबा, विकास आयुक्त आर.एस.पोदद्ार, प्रधान सचिव, योजना एवं वित्त विभाग अमित खरे, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव संजय कुमार, सचिव, वाणिज्य कर विभाग श्रीमती निधि खरे, सचिव राजस्व एवं भूमि सुधार के. के. सोन, अपर वित्त आयुक्त सत्येन्द्र सिंह, उत्पाद आयुक्त सुनील कुमार सिंह उपस्थित थे।

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