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रेलवे टैरीफ रेग्युलेटरी कमिशन की स्थापना की जानी चाहिए : परिमल नथवाणी [ राज्यसभा सांसद ]

Parimal Nathwaniरांची, झारखण्ड 17 मार्च 2015 ::  राज्यसभा में रेलवे बजट पर बहस में भाग लेते हुए सांसद परिमल नथवाणी ने झारखण्ड और गुजरात की रेलवे सम्बंधी मांगों को प्रस्तुत किया। रेलवे की बुनियादी सुविधाओं में बढ़ोतरी करने की मांग के साथ गुजरात और झारखण्ड में ज्यादा सवारी गाडि़यों की मांग की। रेलवे को खराब आर्थिक परिस्थिति में से बाहर लाने के लिए ट्राई और सी.ई.आर.सी. की तरह रेलवे टैरीफ रेग्युलेटरी कमिशन बनाने का सुझाव भी दिया।

श्री नथवाणी ने बताया कि झारखण्ड उनकी कर्मभूमि है और गुजरात उनका वतन। इसलिए वे दोनों राज्यों की मांगों को सदन के सामने रखेंगे।

झारखण्ड की रेलवे सम्बन्धी मांगों के बारे में बोलते हुए श्री नथवाणी ने कहा कि रेलवे की आय में झारखण्ड राज्य का 11 प्रतिशत योगदान है। केवल चैदह साल से अस्तित्व में आए झारखण्ड राज्य में रेलवे के विकास के लिए कोई खास कदम नहीं उठाए गये हैं और नई ट्रेने आबंटित नहीं की गई हैं। सन 2002 से राज्य में छः रेलवे लाईन परियोजनाएं लम्बित हैं, उन्हें त्वरित गति से आगे बढ़ाना चाहिए।

दिल्ली और रांची के बीच दौड़ती राजधानी ट्रेनों के डिब्बों की हालत खस्ता है, इतना ही नहीं वह सप्ताह में केवल दो दिन चलती है। इसलिए नये डिब्बों के साथ राजधानी ट्रेन प्रति दिन चलाई जानी चाहिए, रांची/जमशेदपुर और सुरत, रांची और अहमदाबाद, रांची और मुंबई के बीच गाडि़यां चलानी चाहिए। रांची के उपनगर हटिया को माॅर्डन रेलवे स्टेशन बनाने की भी मांग की।

गुजरात में छः नये जिलों की रचना की गई है और जिला मथकों में बुनियादी सुविधाओं की बढ़ोतरी करना आवश्यक है, देवभूमि द्वारका नगर देश के चार पवित्र यात्रा धामों में से एक है। द्वारका को माॅडल रेलवे स्टेशन बनाने की घोषणा बहुत समय पहले की गई थी लेकिन इस दिशा में कोई कार्यवाही नहीं हुई हैं.

देवभूमि द्वारका जिले के मुख्यालय जाम खंभालिया में रेलवे स्टेशन पर सिर्फ एक ही प्लेटफार्म है। लोग ट्रेन में चढ़ने-उतरने के लिए घर से स्टूल ले कर आते हैं यह दयाजनक स्थिति है, ऐसा कहते हुए श्री नथवाणी ने खंभालिया स्टेशन पर ट्रेन में स्टूल की सहायता से चढ़ते-उतरते यात्रियों की तस्वीरें भी सदन में प्रस्तुत कीं।

 श्री नथवाणी ने गिर जंगल में से गुजरती हुई पिपावाव-अमरेली रेलवे की पटरी पर एशियाइ शेरों की होती मौतों पर रेलवे मंत्री का ध्यान आकर्षित किया। आपने कहा कि राज्य सरकार ने रेल की पटरी पर शेरों की मृत्यु रोकने के लिए सम्बद्धित रेलवे अधिकारियों के साथ मंत्रणा की है ओर रेलवे लाइन पर फेन्सिंग आदि के लिए बजट भी आबंटित किया है। परंतु रेलवे मंत्रालय की ओर से आगे की कार्यवाही नहीं की गई है।

श्री नथवाणी ने बताया कि रेल किराया राजनीतिक मुद्दा बन गया है। एक तरफ रेलवे की वित्तीय परिस्थिति नाजुक है और दूसरी तरफ यात्री सुविधाओं में बढ़ोतरी की मांग होती रहती है। इसलिए रेलवे का किराया तय करने के लिए टेलिकोम रेग्युलेटरी अथॉरिटी और इलेक्ट्रीसिटी रेग्युलेटरी अथॉरिटी की तर्ज पर रेलवे टेरीफ रेग्युलेटरी कमिशन की रचना की जानी चाहिए.

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