सन् 2022 में जब हम आजादी की 75 वीं वर्षगांठ मनायेंगे, तब हम 175 गीगावाट अक्षय उर्जा का उत्पादन भी कर रहे होंगे :: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

सन् 2022 में जब हम आजादी की 75 वीं वर्षगांठ मनायेंगे, तब हम 175 गीगावाट अक्षय उर्जा का उत्पादन भी कर रहे होंगे :: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीखूंटी, झारखण्ड । अक्टूबर । शुक्रवार | 02, 2015 :: झारखंड में कोयले का अकूत भंडार, फिर भी इस राज्य ने विकास के लिए अक्षय उर्जा का विकल्प चुना, ये सिर्फ एक सराहनीय कदम ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल है। उक्त बातें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खूंटी स्थित न्यायालय परिसर में रुफटॉप सोलर पावर प्लांट के उद्घाटन के बाद एक विशाल जनसभा को संबोधित करने के दौरान कही।

प्रधानमंत्री ने देश की जनता से आह्वान किया कि वे पर्यावरण के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं ताकि आनेवाली पीढ़ी को हम एक स्वच्छ वातावरण दे सकें। उन्होंने कहा कि आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती है, इस मौके पर प्रकृति के संरक्षण के लिए किये जा रहे प्रयास से पूरे विश्व को प्रेरणा लेने की जरुरत है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सन् 2022 में जब हम आजादी की 75 वीं वर्षगांठ मनायेंगे, तब हम 175 गीगावाट अक्षय उर्जा का उत्पादन भी कर रहे होंगे।

उन्होंने हाल ही में अपनी संयुक्त राष्ट्र संघ के दौरे का वाक्या सुनाया और कहा कि विश्व के नेता पर्यावरण में आ रही तब्दीली, बढ़ते प्रदुषण पर चिंता जता रहे है, पर उन्हें इस बात का गर्व है कि भारत की 125 करोड़ की आबादी इसे प्रदुषित करने के पाप में भागीदार नहीं है। इसके बावजूद भारत पर्यावरण के संरक्षण और उसे बेहतर बनाने में अपनी भूमिका को निभाने के प्रति वचनबद्ध है। प्रधानमंत्री ने ऋग्वेद से लिए गये एक वक्तव्य को जनता के समक्ष रखा और कहा। ऋग्वेद कहता है – “भगवान सूर्य चल और अचल की आत्मा है” इसे दुनिया आज स्वीकार कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि हमारे देश के आदिवासी भाई-बहनें प्राचीनकाल से प्रकृति का संरक्षण करते आए है।

उन्होंने आम जनता से आह्वान किया कि वे उर्जा की बचत पर ध्यान लगाएं। एलईडी बिजली बल्ब का प्रयोग करें, इससे बिजली की खपत कम और बिल भी कम आता है। उन्होंने सौर उर्जा के बारे में पूर्व में उनके साथ हुई दिलचस्प घटना की जानकारी आम जनता को दी। उन्होंने कहा कि एक न्यायाधीश ने अपने यहां मामलों के लंबित होने के लिए बिजली का रोना रोया था। न्यायाधीश का कहना था कि सप्ताह में केवल दो दिन बिजली रहती है, ऐसे में अदालती कार्यवाही नहीं हो पाती, जिससे न्यायालय में मामले लंबित रह जाते है, पर खूंटी में अब ऐसा देखने को नहीं मिलेगा। खूंटी की अदालत उर्जा के मामले में आत्मनिर्भर हो गयी है, इससे दो फायदे हैं, पहला पर्यावरण का संरक्षण और दूसरा बिजली के अभाव से सदा के लिए मुक्ति।

इस अवसर पर राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि अपना राज्य देश के सपनों को साकार करने के लिए अपनी भूमिका ईमानदारी से निभा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने संकल्प लिया है कि जिस तरह देश में हरित क्रांति, श्वेत क्रांति और नीली क्रांति हुई, उसी तरह इस राज्य में हम उर्जा क्रांति लाएंगे, क्योंकि बिना बिजली के विकास की बात ही बेमानी है। उन्होंने कहा कि बिजली उत्पादन के लिए झारखंड में संसाधनों की कोई कमी नहीं, हम पांच वर्षों में बिजली के क्षेत्र में राज्य को आत्मनिर्भर बना देंगे, साथ ही अन्य राज्यों को भी बिजली उपलब्ध करायेंगे। मुख्यमंत्री ने इस दौरान राज्य के घरेलु उपभोक्ताओं को दस एलईडी बल्ब सस्ते दरों पर उपलब्ध कराने की बात कहीं। उन्होंने कहा कि झारखंड स्वच्छ भारत और डिजिटल इंडिया के सपनों के साथ मजबूती से खड़ा है।

इस अवसर पर राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू, झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति वीरेन्द्र सिंह, डी एन पटेल, केन्द्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री सुदर्शन भगत, सांसद कड़िया मुंडा, एवं झारखंड सरकार के ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा भी उपस्थित थे।

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