हमारा बचपन, हमारा अधिकार’
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हमारा बचपन, हमारा अधिकार’

हमारा बचपन, हमारा अधिकार’राँची, 20 नवम्बर 2013 :: राँची विश्वविद्यालय स्थित आर्यभट्ट सभागार में ‘हमारा बचपन, हमारा अधिकार’ विषयक कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि बच्चों का बेहतर विकास जरूरी है, तभी हमारे परिवार, समाज एवं राज्य का बेहतर भविष्य बन सकेगा। यह आयोजन अन्तर्राष्ट्रीय बाल अधिकार दिवस के अवसर पर झारखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा आयोजित किया गया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आयोजन विशुद्ध रूप से बच्चों के लिए है। समाज में बच्चों का एक अलग एवं अहम स्थान है। 21वीं सदी में शिक्षा की अहम भूमिका है और सभी बच्चों तक शिक्षा पहुँचे सरकार इसके लिए गम्भीरता से प्रयास कर रही है। वक्त के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए शिक्षा ग्रहण करना आवश्यक है। शिक्षा के साथ ही साथ उनका समग्र विकास हो इसके लिए कृषि एवं स्वरोजगार के साथ जुड़ना भी आवश्यक है। बच्चे समाज और राज्य का भविष्य है इसलिए आवश्यक है कि बच्चों का बेहतर विकास हो। बच्चों के शैक्षणिक, मानसिक एवं शारीरिक विकास के लिए सभी के सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है। बच्चों को सहानुभूति एवं प्यार की जरूरत है। अभिभावक होने के नाते हमारा कत्र्तव्य है कि हम बच्चों को अच्छा वातावरण उपलब्ध कराएं एवं उन्हें उनका अधिकार मिले।

उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि इस कार्यक्रम में सामान्य बच्चों के साथ शारीरिक रूप से अक्षम बच्चों को भी आमंत्रित किया गया है। इन विशेष बच्चों सहित सभी बच्चों को एक माला में पिरोने का बाल आयोग द्वारा यह प्रयास सराहनीय है तथा इसे आगे बढ़ावा देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम से बच्चों के प्रतिभा को बढ़ावा दिया जा सकता है। ऐसे कार्यक्रम का आयोजन प्रखण्ड एवं गाँव स्तर पर भी होने चाहिए। उन्होंने झारखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पहल की सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे बहुत खुशी है कि कस्तूरबा गाँधी के बच्चे लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कस्तूरबा गाँधी जैसा विद्यालय और भी खोले जाने की पहल की जा रही है। इसके लिए शिक्षा मंत्री भारत सरकार से वार्ता हुई है। बालिकाओं को और बेहतर शिक्षा सुविधा उपलब्ध कराना आवश्यक है। बच्चे समाज एवं राज्य की नीव है। इनके विकास से ही बेहतर समाज की परिकल्पना की जा सकती है।

इस अवसर पर श्रीमती कल्पना सोरेन ने कहा कि बच्चे की तुलना एक छोटी सी कली से की जा सकती है, और अभिभावकों की भूमिका माली की है। भविष्य सुन्दर, खुशहाल एवं सुगंधित हो इसके लिए हम सभी को प्रयास करना होगा। उनकी देखभाल हम सबकी जिम्मेवारी है। एक अभिभावक के तौर पर यदि हमारे कुछ अधिकार है तो बच्चों के अधिकार का हनन न कर उन्हें आगे बढ़ाना होगा ताकि हम उज्ज्वल भारत की कल्पना को साकार कर सके।

इस अवसर पर सचिव समाज कल्याण विभाग राजीव अरूण एक्का, अध्यक्ष बाल आयोग  रूपलक्ष्मी मुण्डा, विकास भारती के सचिव  अशोक भगत, यूनिसेफ के  जाॅब जकारिया, सेव द चिल्ड्रेन के  महादेव हाँसदा, राज्य बाल आयोग के अध्यक्षा  रंजना कुमारी, डाॅ0 सुनीता कात्यायन, सुनील कुमार एवं संजय मिश्रा उपस्थित थे।

Source :: IPRD, Jharkhand

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