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हिन्दी विक्रम संवत 2072 का सूर्योदय कालिन लग्न कुंडली के अनुसार फलादेश

रांची,झारखण्ड 21 मार्च 2015 ::  डा. सुनील बर्मन ‘‘स्वामी दिब्यानन्द‘‘ के अनुसार हिन्दी विक्रम संवत 2072 का सूर्योदय कालिन लग्न कुंडली के अनुसार फलादेश Dr. Sunil Burmanनववर्ष की कुंडली उत्तराभाद्र नक्षत्र के चतुर्थ चरण, शनि की महादशा, मीन लग्न, मीन एवं राशि में हुआ है।
लग्नेश बृहस्पति पंचम स्थान में उच्च्स्थ विराजमान होकर कुंडली की शोभा बढा रहे हैं, इससे संकेत मिलता है, कि राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में बिशेष उन्नति होगी, साथ ही अध्ध्यन अध्यापन से संबधित लोग जैसे बिद्यार्थी या अध्यापक वर्ग के लोगों को अपने क्षेत्र में लाभ के अवसर मिलेंगे।
लग्नेश के स्वभाव एवं बलाबल की स्थिति के अनुसार राज्य या राज्य में धर्म कर्म से संबधित क्षेत्र में लगे लागों को भी उनके अपने क्षेत्र में लाभ एवं उन्नति होंगे, धार्मिक क्रियाकलाप काफी होंगे, लोगों को ईस क्षेत्र में रुची भी बढेगी।
लाभेश शनि भाग्य स्थान में स्थित हैं, ईससे भी संकेत मिलते हैं, कि राज्य में बडे ही पराक्रम भाव एवं तत्परता के साथ सही दिशा में कार्य होंगे, और राज्य उन्नति की अेार अग्रसर होगा।
निश्चित रुप से कुंडली में प्रतिकूलता भी परिलक्षित होता है, जैसे लग्न में एक ही साथ चार ग्रहों का होना, ग्रहण योग का निर्माण होना, चांडाल योग, तथा सप्तम भाव में राहू की स्थिति, जिससे यह माना जा सकता है, कि राज्य को कभी कभी विषम परिस्थितियों का सामना करना पड सकता है, यानि राज्य के संचालनकर्ता, जिनके हाथ में नियंत्रण की डोर है, प्रतिकूल स्थितियों का सामना करना पडेगा, पर कुंडली को संपूर्णता एवं सावधानीपूर्वक विशलेषण के पश्चात कहा जा सकता है, कि पुनः नियंत्रित कर लिया जायगा।
निष्कर्ष में ये कहा जा सकता है, कि राज्य के साथ प्रजा खुशहाली के साथ अपने अपने क्षेत्र में उन्नति की ओर अग्रसर होते जायेंगे, एक अच्छे नेतृत्व का परिचय भी मिलेगा।
वर्ष के प्रथम सूर्योदय कालिन कुंडली21-Raashiphal

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