होलिका दहन में नई फसल का कुछ भाग आहुति में अवश्य डाले : डॉ सुनील बर्मन

Lens Eye - News Portal - होलिका दहन में  नई फसल का कुछ भाग आहुति में अवश्य डाले : डॉ सुनील बर्मनरांची, 26 मार्च 2013 :: रांची के जाने माने  ज्योतिष डॉ सुनील बर्मन [ स्वामी दिव्यानंद ] के अनुसार होलिका दहन के लिए पूर्णिमा तिथि का होना तथा भद्रा रहित होना अनिवार्य है। 26 मार्च को भद्रा, दिन के 3.49 मिनट से रात्रि शेष 3.28 बजे तक है। जैसा की ज्ञात है की भद्रा उपरांत ही कोई भी शुभ कार्य करने का विधान है। इस साल यानि 2013 में होलिका दहन 26 तारीख को होगी। चतुर्दर्शी दिन के 3.39 बजे तक है, तदुपरांत पूर्णिमा लगती है।

होलिका दहन के लिए पूर्णिमा तिथि का होना तथा भद्रा  रहित होना अनिवार्य है।  इस बार ऐसा संयोग है की होलिका दहन लगभग भोर भोर को ही संपन्न होगी।

Lens Eye - दोबारा नहीं आएगी 12.12.12.होलिका दहन की पूजन विधि

होलिका दहन करने से पहले होली की पूजा की जाती है। इस पूजा को करते समय पूजा करने वाले व्यक्ति को होलिका के पास जाकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए।

डॉ बर्मन के अनुसार होलिका दहन में  नई फसल का कुछ भाग, जैसे पके चने की बालियां व गेहूं की बालियां आहुति में अवश्य डाले

पूजा करने के लिए निम्न सामग्री को प्रयोग करना चाहिए-

एक लोटा जल, माला, रोली, चावल, गंध, पुष्प, कच्चा सूत, गुड़, साबुत हल्दी, मूंग, बताशे, गुलाल, नारियल आदि का प्रयोग करना चाहिए।

Lens Eye - News Portal - होलिका दहन में  नई फसल का कुछ भाग आहुति में अवश्य डाले : डॉ सुनील बर्मनकच्चे सूत को होलिका के चारों ओर तीन या सात परिक्रमा करते हुए लपेटना होता है। फिर लोटे का शुद्ध जल व अन्य पूजन की सभी वस्तुओं को एक-एक करके होलिका को समर्पित किया जाता है।

रोली, अक्षत व पुष्प को भी पूजन में प्रयोग किया जाता है। गंध-पुष्प का प्रयोग करते हुए पंचोपचार विधि से होलिका का पूजन किया जाता है। पूजन के बाद जल से अर्घ्य दिया जाता है।

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