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13वां इंटरनेशनल प्रेक्षा मेडीटेशन शिविर.

Lens Eye - News Portal - 13वां इंटरनेशनल प्रेक्षा मेडीटेशन शिविर. नई दिल्ली, 16 अक्टूबर, 2014 :: अणुव्रत अनुषास्ता आचार्यश्री महाश्रमण के सान्निध्य में अध्यात्म साधना केन्द्र में अंतरराष्ट्रीय प्रेक्षाध्यान शिविर का आयोजन हुआ। जिसमें रूस, स्वीडन, युगाण्डा और भारत के 70 संभागियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। विषेश ज्ञातव्य रहे कि रूस के कुरवर शहर में लगभग एक हजार लोग प्रतिदिन प्रेक्षाध्यान का अभ्यास कर रहे हैं। उनमें से कुछ प्रतिनिधियों ने इस शिविर में उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त किया।

आचार्यश्री महाश्रमणजी ने इस विदेशी संभागियों के साथ देश के कोने-कोने से आये हजारों श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा – ‘‘संपिख्ये अप्प गमप एणं’’ अर्थात अपने से अपने को देखें। दूसरों की पहचान करने से भी कठिन कार्य है – अपने भीतर झांकना। प्रेक्षाध्यान आत्मदर्शन की कला है – प्रेक्षाध्यान के प्रारंभ में पांच उपसम्पदाएं दिलाई जाती है भावक्रिया, प्रतिक्रिया विरती, मैत्री, मिताहार एवं मित भाषण ये जीवन में बहुत महत्त्वपूर्ण है – इन पांच सूत्रों को जीवन में अपनाया जाये तो भी जीवन में ध्यान सफल हो जायेगा। प्रतिदिन जीवन में प्रेक्षाध्यान और स्वाध्याय चलना चाहिए। इनकी प्रतीती से हमारे भीतर की उर्जा का प्रस्फुटन होता है। इन विदेशी प्रेक्षाध्यानियों के बारे में कहा जा सकता है इनमें से अधिकांश सकारात्मक शक्ति से ओत प्रोतः मोक्षगामी जीव है। चाहे व्यक्ति रूस में रहे या भारत में हमारे जीवन में साधना रहनी चाहिए। इन्द्रिय विजय पुश्ट हो राग द्वेश से मुक्ति मिले चाहे निंदा हो या प्रशंसा चाहे अपमान हो या सम्मान हम अपने जीवन में समता को धारण करें इस मानव जीवन में भोग ही सबकुछ नहीं है योग भी हमारे जीवन में चलना चाहिए। भोग पर योग का, राग पर त्याग का, मनोरंजन पर आत्मरंजन का, प्रवृत्ति पर निवृत्ति का अंकुश रहे। सभी का जीवन सफल सानन्द बने।

Lens Eye - News Portal - 13वां इंटरनेशनल प्रेक्षा मेडीटेशन शिविर.मंगलाचरण प्रेक्षा गीत की प्रस्तुति रूस के कुरवर ग्रुप ने दी। स्काट होम के मिस्टर टेªन, साइबेरिया की जेकोवा लिमिया और भारत की शीतल सेठिया ने अपने अनुभव बांटते हुए कहा कि हमने बहुत दुनिया घुमी है किन्तु हमें शाति का और आत्म साक्षात्कासर का पथ यहीं से प्राप्त हुआ है। हमें हमारे सवालों के जबाव मिल गये हम इस पद्धति से अपने मित्रों और पारिवारिकजन को भी लाभ पहुंचायेंगे।

मुनिश्री किशनलाल स्वामी, मुनिश्री दिनेशकुमार, सुखराज सेठिया एवं अरविन्द गोठी ने भी अपने विचारों की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का कुशल संचालन मुनि कुमारश्रमण ने किया।

जीवन विज्ञान पोस्ट का लोकार्पण: जीवन विज्ञान दिवस के पोस्टर का लोकार्पण हेतु गोविन्द बाफना एवं अरविन्द गोठी ने आचार्य प्रवर को उपहृत किया। शिक्शक संसद के अध्यक्श श्री भीखमचन्द नखत एवं पटना से समागत श्री तनसुख बैद ने भी अपनी पुस्तक पूज्य आचार्यश्री महाश्रमण को उपहृत की।

प्रेषक – डा. कुसुम लूणिया

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