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भारतीय रेलवे ने शुरु किया गैर-परंपरागत उर्जा स्त्रोतों का उपयोग

05-Indian-Railwayअगस्त | 5, 2016 :: भारतीय रेल ने जून, 2015 से परीक्षण आधार पर, कर्षण उद्देश्यई के लिए उच्चस गति डीजल (एच.एस.डी) के विकल्प  के रूप में बायो-डीजल (डीजल के साथ 5% सम्मिश्रण) का उपयोग शुरू किया है। इसके अलावा, भारतीय रेल का अगले कुछ वर्षों में रेलवे भवनों/स्टे-शनों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थािपित करके तथा पूरे देश में भूमि आधारित सौर ऊर्जा संयंत्रों के माध्य्म से 1000 मेगा वॉट सौर ऊर्जा दोहन का विचार है। केन्द्रीय रेल राज्य मंत्री राजेन गोहांई ने राज्यसभा में अगस्त 4, 2016 को सांसद  परिमल नथवाणी द्वारा पूछे गये प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी।

मंत्रीजी ने बताया कि बायो-डीजल के लिए किसी विशेष धन के आबंटन का विचार नहीं है क्योंीकि यह ईंधन लागत का एक भाग है, जिसके लिए बजट में पहले ही प्रावधान है।श्री नथवाणी रेलवे का डीजल और विद्युत ऊर्जा के विकल्पै के तौर पर गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करने के प्रस्तावव और इस संबंध में आबंटित किए जानेवाली निधियां के बारे में जानना चाहते थे।

मंत्रीजी के निवेदन के अनुसार, यह योजना है कि इसके भाग के रूप में, रेलवे द्वारा बिजली खरीद समझौता (पीपीए) के साथ विकासकर्ताओं के माध्यसम से सौर ऊर्जा संयंत्रों को रेलवे भवनों की छतों पर और आंशिक रूप से भूमि आधारित प्रणालियों पर स्थायपित किया जाएगा। छतों पर संयंत्रों के लिए, 50 मेगा वॉट सोलर फोटोवोल्टिक इकाइयों के लिए निविदाएं जारी कर दी गई हैं।

मंत्रीजी के निवेदन के मुताबित, भारतीय रेल का स्वयं अथवा रेलवे ऊर्जा प्रबंधन कंपनी लिमिटेड (आरईएमसीएल) के माध्यीम से लगभग 150 मेगा वॉट पवन ऊर्जा के दोहन का भी प्रस्ताजव है। आज तक लगभग 13 एमडब्यूम    सौर और 37 मेगा वॉट पवन ऊर्जा संयंत्रों सहित कुल लगभग 50 मेगा वॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थाैपित की गई है, ऐसा मंत्रीजी ने बताया।

श्री नथवाणी के और एक प्रश्न के उत्तर में केन्द्रीय रेल राज्य मंत्रीजी ने बताया कि रेलवे सभी स्टेशनों पर पीने योग्य पानी की व्यवस्था करने के लिए प्रयासरत रहती है। पानी की गुणवत्ता की आवधिक जांच के लिए अनुदेश पहले से मौजूद हैं और यदि कोई कमी पाई जाती है, तो सुधारात्मक कारवाई की जाती है, ऐसा मंत्रीजी ने बताया।

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