दर्शनशास्त्र की अनुपम बागे ने लिया देश की सीमा सुरक्षा का संकल्प
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दर्शनशास्त्र की अनुपम बागे ने लिया देश की सीमा सुरक्षा का संकल्प

दर्शनशास्त्र की अनुपम बागे ने लिया देश की सीमा सुरक्षा का संकल्परांची, झारखण्ड । जुलाई । 16, 2016 :: अपने देश के प्रति सम्मान रखने वालों की कमी नहीं है। कुछ लोगों की प्राथमिकता सूची में देश सबसे उपर होता है। देश की सुरक्षा के लिये ऐसे लोग किसी भी हद तक जा सकते हैं। दर्शनशास्त्र पढ़ने वाली अनुपम बागे ने सीमा सुरक्षा बल में योगदान कर अपने देश की सीमा को हर प्रकार से सुरक्षित रखने का संकल्प लिया है।

राँची विश्वविद्यालय के पी.जी. फिलाॅस्फी की 2013-15 सत्र की छात्र अनुपम बागे ने सीमा सुरक्षा बल में जाने का मन बना लिया था। इसलिये अक्टूबर 2014 में उसने सारी बाधाओं को पार करते हुए 199 बटालियन ज्वाइन कर लिया। हैरानी की बात है कि उसके बटालियन में वर्तमान में 40 महिलाएँ सीमा सुरक्षा के कामों में लगी हुई हैं। अनुपम ने बताया कि 2008 के पहले सीमा सुरक्षा बल में महिलाओं की नियुक्ति नहीं होती थी। अनुपम की पूरी ट्रेनिंग सिल्लीगुड़ी के बैकुंठपुर, सालुगढ़ा ट्रेनिंग कैम्प में हुई।

मूल रूप से सिमडेगा के बानो ग्राम की रहने वाली अनुपम की शिक्षा दीक्षा झारखंड में ही हुई। मैट्रिक संत अन्ना स्कूल, लचरागढ़ सिमडेगा से, इन्टरमीडिएट की पढ़ाई संत जोसेफ काॅलेज तोरपा से, ग्रेजुएशन मारवाड़ी काॅलेज राँची और पी.जी. फिलाॅस्फी की पढ़ाई राँची विश्वविद्यालय से अनुपम ने की है। सीमा सुरक्षा बल में जाने की ललक के कारण वह अपनी अंतिम पढ़ाई पूरी नहीं कर पाई। वह अब चाहती है कि विश्वविद्यालय उसे अनुमति दे तो अपनी पी.जी. की पढ़ाई पूरी कर लेगी।

पूछने पर अनुपम ने बताया कि घर में पहले से ही देश सेवा का माहौल है। पिता मरसलन बागे इ.एस.एम. रेजिमेंट में आर्मी अधिकारी थे। माँ रूथ बागे हाउस वाईफ हैं। अनुपम को अपने पिता से ही प्रेरणा मिली। अब वह स्वयम् कई अन्य लड़कियों के लिए भी प्रेेरणा स्रोत बन गई है।

भारत-बांगलादेश, उत्तर बंगाल की सीमा पर तैनात अनुपम अभी जेनरल ड्युटी कर रही है। बकौल अनुपम के कि कार्य स्थल पर एकदम घरेलु माहौल होता है। लड़कियों के लिए बिल्कुल सुरक्षित वातावरण में काम करने का माहौल मिलता है।

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