Global Iodine Deficiency Disorder Prevention Day : 21st of October every year

Global Iodine Deficiency Disorder Prevention Day : 21 October every year

October | Friday | 21, 2016 :: Global Iodine Deficiency Disorder Prevention Day : 21 October every year

Introduction

Global Iodine Deficiency Disorders (IDD) Prevention Day is observed every year on 21 October. It seeks to generate awareness of the need for adequate iodine intake and highlights consequences of iodine deficiency. Iodine is a micro nutrient required for human growth and development. The iodine deficiency is a major public health problem across the world.

Iodine deficiency causes goiter, mental retardation, deaf-mutism, difficulties in standing/walking or stunting. Iodine deficiency during pregnancy may result into still births, abortions, deformed baby or cretinism. The government promotes universal consumption of iodised salt as an essential micronutrient intervention.

Status in Jharkhand

  • Household consumption of Iodised salt is 57% (Ministry of Women & Child Developments’ RSOC 2013-14 data)
  • Iodine deficiency is endemic in 7 districts -Sahebgunj, Godda, Dumka, Deoghar, Palamu, Gumla, Lohardaga and Ranchi
  • A recent National Institute of Nutrition (NIN) survey found that availability of low cost substandard salt in the market led to low consumption of Iodised salt by households

Issues

  • Entry of substandard/uniodised salt by road in Jharkhand. This is purchased by small traders and these consignments are tested and difficult to track.
  • Salt supplied from PDS is not regular and does not cover all BPL families (NIN Survey)
  • Legal sample collection of salt is a must for initiating any legal action. Medical Officer in Charge (MOICs) have been designated as Food Safety Officer (FSO) but sample collection of any food item including salt is neglected. There is a need for recruitment of designated FSOs for this purpose.

Action required

  • Regular monitoring of oidized salt transported by rail and road
  • Sensitization of salt traders at all 5 divisions in Jharkhand
  • On the spot salt sample collection and lab testing
  • Regular interdepartmental core group meeting at state & district level

State level Programmes

  • Sensitization workshop for officials from the departments of Health & Family Welfare; Women & Child Development; Human Resource Development; Food & Public Distribution; & Panchayat Raj on 19 October 2016.
  • Orientation of district and block officials as well as salt traders in Deoghar, Bokaro, Ranchi and East Singhbhum in October & November 2016
  • Salt sample collection campaign in all 24 District from 21 Oct – 21 Nov 2016 by ACMOs and FSOs.
  • Orientation of national & state trainers’ team (sahiya training cell) on micronutrients and the universal salt Iodization programme.

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विश्व आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण दिवस

परिचय

विश्व आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण दिवस प्रत्येक वर्ष 21 अक्टूबर को मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य लोगों को पर्याप्त मात्रा में आयोडीन के सेवन के प्रति जागरूक करना और इसके अभाव से होने वाले नुकसान से अवगत कराना है। आयोडीन एक सूक्ष्म पोषक तत्व है, जो कि मानव के विकास के लिए आवश्यक है। आयोडीन की कमी के कारण दुनिया भर में लोगों को कई प्रकार की शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

आयोडीन की कमी के कारण घेघा रोग, मंद बुद्धि, बहरापन-गूंगापन, खड़े होने/टहलने में परेशानी और बौनेपन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में आयोडीन की कमी होने पर मृत बच्चा पैदा होना, गर्भपात या विकृत एवं बौने बच्चेके पैदा होने की संभावना रहती है। आयोडीनयुक्त नमक के सेवन को आवश्यक पोषक हस्तक्षेप के रूप में सरकार प्रोत्साहन देती है।

झारखंड में स्थिति

  •  राज्य में मात्र 57 प्रतिशत लोग आयोडीन युक्त नमक का सेवन करते हैं (आरएसओसी 2013-14, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय)
  •  राज्य के 7 जिलों में लोगों में आयोडीन की कमी है। ये हैं – साहेबगंज, गोड्डा, दुमका, देवघर, पलामू, गुमला, लोहरदगा और रांची
  • राष्ट्रीय पोषण संस्थान के हालिया सर्वे के अनुसार बाजार में आयोडीन विहीन घटिया नमक के कम कीमत होने के कारण अधिकतर घरों में उसका सेवन किया जाता है।

मुद्दे

  •  आयोडीन विहीन घटिया नमक का प्रवेश सड़क के रास्ते होता है एवं इसकी खरीदी छोटे व्यापारियों के द्वारा की जाती है,जिसके कारण इसकी निगरानी करना एवं जांच करना थोड़ा कठिन है।
  • जनवितरण प्रणाली की दुकानों में आयोडीन युक्त नमक की आपूर्ति नियमित रूप से नहीं होती है। इसके अलावा इसमें गरीबी रेखा से नीचे के सभी परिवारों को शामिल नहीं किया गया है।
  • आयोडीन रहित नमक बेचने वाले दुकानदारों पर कानूनी कार्रवाई हेतु यह आवश्यक है कि कानूनी रूप से नमूने इकट्ठे किए जाएं। प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी (एमओआइसी) को ही खाद्य सुरक्षा अधिकारी( एफएसओ)  का भी प्रभार दिया गया है, लेकिन किसी भी खाद्य सामग्री के नमूने यहां तक की नमक के नमूने के संग्रह को भी नजरअंदाज कर दिया जाता है। इस काम के लिए अलग से खाद्य सुरक्षा अधिकारी (एफएसओ) की नियुक्ति आवश्यक है।

कार्यवाही की आवश्यकता

  •  रेल एवं सड़क मार्ग द्वारा आयोडीन युक्त नमक के परिवहन पर निगरानी
  •  झारखंड के सभी 5 प्रमंडलों में नमक व्यापारियों का संवेदीकरण करना
  •  मौके पर ही नमूना एकत्रीकरण और जांच की व्यवस्था
  • जिला एवं राज्य स्तर पर नियमित रूप से अंर्तविभागीय कोर ग्रुप की बैठक

राज्य स्तरीय कार्यक्रम

  • 19 अक्टूबर 2016 को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास, मानव संसाधन विकास, खाद्य एवं जनवितरण और पंचायती राज विभाग के अधिकारियों के लिए संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन
  •  देवघर, बोकारो, रांची और पूर्वी सिंहभूम में अक्टूबर और नवंबर माह में प्रखंड एवं जिला अधिकारियों के साथ-साथ नमक व्यापारियों का उन्मुखीकरण
  • सभी 24 जिलों में 21 अक्टूबर से 21 नवंबर तक एसीएमओ और एफएसओ के द्वारा नमूना एकत्रीकरण अभियान का संचालन
  •  राष्ट्रीय और राज्य के ट्रेनरों की टीम (सहिया ट्रेनिंग सेल) का सूक्ष्म पोषक तत्वों और सार्वभौमिक आयोडीन युक्त नमक कार्यक्रम पर उन्मुखीकरण

 

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