पलामू :: श्री वंशीधर महोत्सव नगर ऊंटारी के गोसाइबाग मैदान में 25 व 26 मार्च 2017 को

Sri Bansidhar mahotsavनगर ऊंटारी,पलामू, झारखण्ड ।  मार्च | 04, 2017 :: श्री वंशीधर महोत्सव का आयोजन 25 एवं 26 मार्च 2017 को नगर ऊंटारी के गोसाइबाग मैदान में होगा। कार्यक्रम में झारखण्ड के सीएम रघुवर दास के साथ केंद्र व् राज्य सरकार के कई मंत्री हिस्सा लेंगे। महोत्सव में कलाकार मालिनी अवस्थी, अनूप जलोटा, चन्दन तिवारी, मनोज तिवारी के भाग लेने की संभावना है।

उल्लेखनीय है कि यहां वंशीधर महोत्सव के लिए पलामू सांसद विष्णुदयाल राम पिछले एक साल से प्रयासरत थे। पिछले साल महोत्सव का आयोजन नहीं हो सका था। श्री वंशीधर मंदिर को अंतराष्ट्रीय क्षितिज पर पहचान दिलाने की कोशिश में पलामू सांसद सफल होते दिख रहे हैं। विश्वप्रसिद्ध श्री वंशीधर जी की प्रतिमा होने के बावजूद मंदिर को अपेक्षित ख्याति प्राप्त नहीं हुई। मंदिर को अंतर्राष्ट्रीय पटल पर लाने के लिए सांसद की कोशिशों के बाद वंशीधर महोत्सव के आयोजन के लिए हरी झंडी मिली है। एक साल के दौरान सांसद ने रांची और नई दिल्ली में भागदौड़ कर महोत्सव के आयोजन में आने वाली बाधाओं और अड़चनों को दूर करने में सफलता प्राप्त की।

वंशीधर महोत्सव के आयोजन को लेकर नगर उंटारी के लोगों में हर्ष व्याप्त है।

* झारखंड का मथुरा व वृंदावन है श्रीबंशीधर की नगरी नगर ऊंटारी

* श्रीकृष्ण स्वयं पधारे व अपनी मर्जी से हुये हैं विराजमान

झारखंड का मथुरा वृंदावन है श्री वंशीधर नगरी नगर ऊंटारी। प्रदेश के पश्चिमी छोर पर स्थित उत्तरप्रदेश की सीमा से सटा गढ़वा जिले का नगर ऊंटारी योगेश्वर कृष्ण की भूमि है। नगर ऊंटारी के श्री वंशीधर मंदिर में स्थित श्रीकृष्ण की वंशीवादन करती प्रतिमा की ख्याति देश में ही नही विदेशों में भी है। इसलिए यह स्थान श्री वंशीधर धाम के नाम से भी प्रसिद्ध है। यहां कण कण में राधा व कृष्ण विद्यमान हैं। इसका सबसे प्रमुख कारण भी है जिसका उल्लेख करना जरुरी है। यहां भगवान श्रीकृष्ण स्वयं पधारे हैं व अपनी मर्जी से ही नगर ऊंटारी गढ़ के मुख्य द्वार पर विराजमान हुये हैं।
नगर ऊंटारी में प्रतिवर्ष श्रीकृष्ण की जयंती जन्माष्टमी मथुरा एवं वृन्दावन की तरह मनाई जाती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यहां भगवान श्रीकृष्ण त्रिदेव अर्थात ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों स्वरूप में हैं।
मंदिर में स्थित प्रतिमा को गौर से देखने पर यहां भगवान के त्रिदेव के स्वरूप में विद्यमान रहने का अहसास होता है। यहां स्थित श्रीवंशीधरजी जटाधारी के रूप में दिखाई देते है जबकि शास्त्रों में श्रीकृष्ण के खुले लट और घुंघराले बाल का वर्णन है इस लिहाज से मान्यता है कि श्रीकृष्ण जटाधारी अर्थात देवाधिदेव महादेव के रूप में विराजमान हैं। श्रीकृष्ण के शेषशैय्या पर होने का वर्णन शास्त्रों में मिलता है लेकिन यहां श्रीवंशीधरजी शेषनाग के उपर कमलपुष्प पर विराजमान हैं जबकि कमलपुष्प ब्रह्मा का आसन है इस लिहाज से मान्यता है कि कमल पुष्पासीन श्रीकृष्ण कमलासन ब्रह्मा के रूप में विराजमान हैं। भगवान श्रीकृष्ण स्वयं लक्ष्मीनाथ विष्णु के अवतार है इसलिये विष्णु के स्वरूप में विराजमान हैं।
गंगा यमुनी संस्कृति एवं धार्मिक भावनाओं से ओत प्रोत खुबसूरत हरी भरी वादियों, कंदराओं, पर्वतों, नदियों से आच्छादित एवं उतरप्रदेश, छतीसगढ़, बिहार तीन राज्यों की सीमाओं को स्पर्श कर उन तीन राज्यों की मिश्रित संस्कृति को समेटे श्री वंशीधर की पावन नगरी नगर उंटारी को पलामू प्रमंडल की सांस्कृतिक राजधानी भी माना जाता है। श्री वंशीधर मंदिर की स्थापना संवत् 1885 में हुई है। किवंदतियों के मुताबिक उस दौरान राजा स्व भवानी सिंह देव की विधवा शिवमानी कुंवर राजकाज का संचालन कर रही थी। रानी शिवमानी कुंवर धर्मपरायण एवं भगवत भक्ति में पूर्ण निष्ठावान थी। बताया जाता है कि एक बार जन्माष्टमी व्रत धारण किये रानी साहिबा को मध्य रात्रि में स्वप्न में भगवान श्री कृष्ण का दर्शन हुआ। स्वप्न में श्री कृष्ण ने रानी से वर मांगने को कहा। रानी ने भगवान श्री कृष्ण से कहा कि प्रभु आपकी सदैव कृपा हम पर रहे। तब भगवान कृष्ण ने रानी से कहा कि  कनहर नदी के किनारे महुअरिया के निकट शिव पहाड़ी में उनकी प्रतिमा गड़ी है वह अपने राज्य मे लायें। भगवत कृपा जान रानी ने शिवपहाड़ी जाकर विधिवत पूजा अर्चना के बाद खुदाई करायी तो श्री वंशीधर जी की अद्वितीय असाधारण प्रतिमा मिली। जिसे हाथियों पर बैठाकर नगर उंटारी  लाया गया। नगर उंटारी गढ़ के मुख्य द्वार पर अंतिम हाथी बैठ गया। लाख प्रयत्न के बावजूद हाथी नहीं उठने पर रानी ने राजपुरोहितों से राय मशविरा कर वहीं पर मंदिर का निर्माण कराया तथा वाराणसी से राधा रानी की अष्टधातु की प्रतिमा मंगाकर स्थापित करायी। श्रीवंशीधर जी प्रतिमा कला के दृष्टिकोण से अति सुंदर एवं अद्वितीय है। बिना किसी रसायन के प्रयोग या अन्य पॉलिस के प्रतिमा की चमक पूर्ववत है। भगवान श्री कृष्ण शेषनाग के उपर कमल पीड़िका पर वंशीवादन नृत्य करते विराजमान हैं। भूगर्भ में गड़े होने के कारण शेषनाग दृष्टिगोचर नहीं होते हैं। महाशिवरात्रि एवं श्री कृष्ण जन्मोत्सव बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है। महाशिवरात्रि के मौके पर प्रसिद्व मेला लगता है जो एक माह तक चलता है तथा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के मौके पर एक सप्ताह तक श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जाता है जिससे नगर उंटारी सहित आस पास के गांवों का माहौल भक्तिमय हो जाता है।

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