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संस्कृति के अनुरूप हो शिक्षा का स्वरूप : रघुवर दास [ मुख्यमंत्री, झारखण्ड ]

10-raghuvar-dasराँची, झारखण्ड | सितम्बर | 10, 2016 :: झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि राज्य में गरीबी का मुख्य कारण है अशिक्षा। सरकार बनने के बाद हमने शिक्षा पर फोकस किया है। हमें राज्य से गरीबी को समाप्त करने के लिए शिक्षा को बढ़ावा देना होगा। सरकार ने सभी स्कूलों में बेंच-डेस्क लगाने का फैसला किया है। अब सरकारी स्कूल के बच्चे नीचे बैठ कर नहीं पढ़ेंगे। वे आज एक स्थानीय अखबार द्वारा रिम्स ऑडिटोरिम में आयोजित गुरु सम्मान समारोह में उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री श्री दास ने कहा कि शिक्षा चरित्र का निर्माण करती है। शिक्षा ज्ञान का माध्यम होना चाहिए न कि डिग्री का। वर्तमान शिक्षा पद्धति त्रुटिपूर्ण है। इसके सुधार को लेकर केंद्र और राज्य सरकार गंभीर है। शिक्षा का स्वरूप संस्कृति, प्रकृति व प्रगति के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में गुरु शिष्य परंपरा में कमी आयी है। हमें अपने संस्कार व व्यवहार से फिर से गुरु शिष्य परंपरा को वापस लाना होगा। इस देश में जितने भी महापुरूष हुए हैं, उनके जीवन को महान बनाने में गुरुजनों का अहम योगदान है। मां व शिक्षक ही किसी व्यक्ति को महान बना सकते हैं। अगर हमें कर्मयोगी बनना है, तो हमें हर हाल में मां व शिक्षक का सम्मान करना होगा।

मुंख्यमंत्री ने कहा कि अमीर-गरीब के बच्चों के शिक्षा का स्वरूप एक समान होना चाहिए, ताकि सरकारी स्कूल के बच्चों में हीन भावना नहीं आये। सरकारी स्कूल के शिक्षक व बच्चों को निजी स्कूलों में बुला कर वहां के वातावरण से अवगत करना चाहिए। ऐसा करने से सरकारी स्कूल के शिक्षक व छात्र भी यहां के अनुशासन का अनुसरण कर सकते हैं। इसकी शुरुआत रांची से होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आर्थिक उदारीकरण और वैश्विकरण के दौर में शिक्षा व्यवसाय बनती जा रही है। अमीर लोगों के बच्चे निजी स्कूल में पढ़ते हैं और गरीब का बच्चा नगरपालिका के स्कूल में जाता है। हमें इस धारणा को बदलने की जरूरत है।

समारोह में नगर विकास मंत्री  सीपी सिंह, शिक्षा मंत्री श्रीमती नीरा यादव, प्रभात खबर के एमडी केके गोयनका, वरिष्ठ संपादक अनुज सिन्हा समेत अन्य लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम में विभिन्न स्कूलों के शिक्षकों को उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रभात खबर की ओर से सम्मानित किया गया।

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