Shiksha Samvad on Grievance Redressal Mechanism and Quality Education
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Shiksha Samvad on Grievance Redressal Mechanism and Quality Education

Shiksha Samvad on Grievance Redressal Mechanism and Quality Education रांची, झारखण्ड मार्च 30, 2015 :: होटल ली लेक, रांची में Shiksha Samvad on Grievance Redressal Mechanism and Quality Education/ विवादों का निपटारा एवं गुणात्मक शिक्षा पर झारखंड शिक्षा संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह एक दिवसीय कार्यक्रम झारखण्ड राईट टू एजुकेशन फोरम ने ओक्सफेम ईडिया, आईएलपी और लीडृ्स के सहयोग से संपन्न किया।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गुणात्मक प्राथमिक शिक्षा और उससे जुडे विभिन्न समस्याओं के निपटारा के लिए अपेक्षित तकनीकों को अपना कर समस्याओं को हल करना है ताकि शिक्षा व इससे जुडे हर स्तर के विवादों का निपटारा आसानी से हो सके। आज के इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि करिया मुण्डा, संसद सदस्य एवं रुप लक्ष्मी मुण्डा, अघ्यक्ष SCPCR के साथ अन्य लोग भी उपस्थित थे। झारखण्ड के 24 जिलों के विभिन्न श्रेणी के करीब 150 प्रतिभागियों ने अपनी उपस्थिति सुनिश्चित की। आज के कार्यक्रम की शुरुआत झारखण्ड राईट टू एजुकेशन फोरम के कनवेनर व लीड्स संस्था के निदेशक ए के सिंह के द्वारा सभी प्रतिभागियों का स्वागत अभिवादन किया गया।
ए के सिंह ने बताया कि बच्चों की शिक्षा के लिए RTE act 2009 में विद्यालय की भूमिका, शिक्षक की जिम्मेवारी, ग्राम पंचायत तथा अभिभावक सभी की जिम्मेवारियों को तय किया गया और यह महत्वपूर्ण है कि शिक्षा से जूडे सभी हितभगियों को अपनी भुमिका व जिम्मेवारियों को समझना होगा अगर इस बीच कोई समस्या आती है जहां बच्चों के अधिकारों का हनन हो रहा हो व उनके शिक्षा मे रुकावट आ रही है तो इस मुद्दे को राज्य स्तर पर उठाना होगा।
करिया मुण्डा, संसद सदस्य-मध्याहृान भोजन का नियमित मुल्यांकन करना चाहिए। देश के विकास के लिए सबकी भागीदारी अनिवार्य है। सभी सरकारी विभाग एवं गैरसरकारी संस्थानों के बीच आपस में साझेदारी हमारी इच्छाओं का स्वरुप बदल सकते है सरके लिए सभी को अपने दायित्वों के प्रति इमानदार होना होगा।Shiksha Samvad on Grievance Redressal Mechanism and Quality Educationइसके बाद राईट टू एजुकेशन फोरम के सहयोग से प्रकाशित तीन पोस्टरों का विमोचन किया गया-
1 विवादों का निपटारा
2 बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009
3 विद्यालय विकास योजना; हमारा विद्यालय हमारी योजनाद्ध
रुप लक्ष्मी मुण्डा, अघ्यक्ष, SCPCR बच्चों के शिक्षा के साथ हमें उनके अधिकारों के बारे में भी ध्यान देना होगा। हरेक जिलों के अनुसार विवाद निपटारा तकनीकों को प्रातसाहन देने की आवष्यकता है और जिला शिक्षा अधिकारी को इसे आगे बढाने की जरुरत है।
विनय पटनायक, एजुकेशन स्पेसलिस्ट, UNICEF उन्होंने तीन मुद्दों पर जोर दिया- 6 से 14 वर्ष के बच्चों को स्कूल में दाखिल करवाना, स्कूल की गतिविधियों में भाग लेना एवं सीखतें रहने के लक्ष्य से हरेक रुप में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करना।
रंजना, सदस्य, SCPCR. बच्चों के स्कूल में नामांकन बढाने के लिए प्रयास जारी रखना होगा। शिक्षा के लिए आवश्यक है अच्छे शिक्षको की नियुक्ति एवं सही प्रशिक्षण हैं। उन्होने उचित मात्रा में समाग्री की उपलब्घी, राज्य केन्द्रीत करीकुलम, कक्षा दूसरी से पांचवी तक के बच्चों पर विशेष ध्यान आदि मुद्दों पर जोर दिया।
रष्मी बडुआ, सेव द चिलड्रन- बच्चों के सर्वागिण विकास के लिए हरेक पडाव में उनकी सहभागिता अनिवार्य है। एक्टीविटी बेस्ड लर्निग- सरकारी या निजी, हरेक स्कूल का मुख्य स्वरुप होना चाहिए।
जीवीएसआर प्रसाद, राज्य सरकार, शिक्षा कंसल्टेंट- कक्षाओं में पढने पढाने की विधियां अभी भी पुराने तरीकों से किया जा रहा है। आज के डिजिटल युग में पुराने तरीके हमारे बच्चों को और पिछडा हुआ बना रहे है। हर ग्राम स्तर पर शिकायत पेटी होनी चाहिए जिससे की विवादों का निवारण आसानी से हो सके।
रमेश शरण प्रोफेसर, रांची यूनिवर्सिटी -उन्होने कहा कि सरकारी स्कूलों में ही क्यो हर बार गतिशीलता पर सवाल खडा होता है जबकी इस राज्य के 80ः बच्चे सरकारी स्कूलों में ही दाखिल हैं। इस संवेदन शील विषय पर बहुत अनिवार्य है कि न केवल सरकार बल्की आम आदमी भी अपनें उपलब्ध संसाधनों का निवेश प्राथमिक रुप से शिक्षा मंन ही करें।

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