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विश्वविद्यालय शिक्षकों की प्रोन्नति नीति की घोषणा हो  :: राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ

22-RU-02रांची, झारखण्ड । नवम्बर । 22, 2015 :: आज दिनांक 22 नवंबर को अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राँची विश्वविद्यालय राँची इकाई की एक बैठक डाॅ॰ सुशील कुमार अंकन की अध्यक्षता में विश्व संवाद केन्द्र निवारणपुर में हुई। इस बैठक में विश्वविद्यालय से संबंधित कई विषयों तथा भविष्य में होने वाले कई कार्यक्रमों पर चर्चा की गई।

सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यू.जी.सी. के निर्णयों के अनुसार ए.पी.आई. की बाध्यता समाप्त होने के बाद भी कई विश्वविद्यालय इसे ढो रहे हैं। कई राज्यों में इसे समाप्त किया जा चुका है। महासंघ शिक्षा मंत्री से मिल कर झारखंड में भी इसे समाप्त घोषित करने की दिशा में प्रयास करेगा।

इसी तरह छठे वेतनमान में विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय के शिक्षकों के लिये मात्र तीन ही पदनाम हैं। प्रोफेसर, एसोशियेट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर। किन्तु राँची विश्वविद्यालय अभी भी लेक्चरर, लेक्चरर सेलेक्शन ग्रेड, लेक्चरर सीनियर स्केल, रीडर आदि पदनाम को ढो रहा है। इसके लिये भी महासंघ जानने का प्रयास करेगा कि किन परिस्थितियों में ये पदनाम अभी भी चल रहे हैं। मंत्री एवं उच्च शिक्षा विभाग से मिलकर इसके समाधान का भी प्रयास किया जायेगा।

उपरोक्त समस्याओं के अतिरिक्त शैक्षिक महासंघ ने चिन्ता जताई कि 31 दिसम्बर 2008 के बाद शिक्षकों के लिये प्रोन्नति नीति की घोषणा अबतक क्यों नहीं की गई ? इस संबंध में भी मानव संसाधन मंत्री एवं उच्च शिक्षा निदेशालय से सम्पर्क किया जायेगा।

आगामी कुछ महिनों में अखिल भारतीय शैक्षिक महासंघ का एक राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम आयोजित करने पर भी विचार किया गया। जिसके स्वरूप और आकार पर बाद के बैठक में निर्णय लिया जायेगा।

आज की इस बैठक में मुख्य रूप से डाॅ॰ ब्रजेश कुमार, डाॅ॰ज्योति प्रकाश, डाॅ॰ सुनीता कुमारी गुप्ता, डाॅ॰ मनोज कुमार, डाॅ॰ पूनम सहाय, डाॅ॰ पम्पा सेनविश्वास, डाॅ॰ बैद्यनाथ कुमार सहित कई शिक्षक शामिल थे।

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