शिक्षा ज्ञान के साथ स्वावलम्बी बनाने वाली होनी चाहिये – विनोद शाण्डिल्य

दमोह, मध्यप्रदेश 02 सितम्बर 2013 :: हमारी शिक्षा व्यवस्था इस प्रकार की होना चाहिये जिसमें ज्ञान के साथ स्वावलम्बी बनाने पर आधारित हो। आप देखेगे कि भारत की प्राचीन शिक्षा व्यवस्था इसी बात पर आधारित थी करोड़ों वर्ष पूर्व गुरूकुल एवं आश्रमों पर आधारित शिक्षण संस्थाओं में कुछ इसी प्रकार की शिक्षा दी जाती थी। यह बात भारतीय जनता पार्टी के अध्यापक प्रकोष्ठ के पूर्व संयोजक विनोद शाण्डिल्य ने कही। वह स्थानीय शासकीय कमला नेहरू महिला महाविद्यालय में भारतीय शिक्षा व्यवस्था में व्यवसायिक शिक्षा की आवश्यकता नीतियां और उसके प्रभाव पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला के अंतिम दिन उपस्थितों को सम्बोधित कर रहे थे।

ज्ञात हो कि उक्त कार्यशाला का आयोजन माधवी वेलफेयर सोसायटी ग्वालियर के तत्वाधान में आयोजित की गई थी। इस अवसर पर प्राचार्य डा. अहिरवार ने कहा कि यह संस्था के लिये गौरव की बात है कि उक्त महत्वपूर्ण विषय को लेकर विद्वान वक्ताओं ने अपने विचारों से उपस्थितों के साथ ही छात्र-छात्राओं के ज्ञान का बढ़ाया। प्राध्यापक डा. पचैरी ने कहा कि उक्त कार्यशाला से निश्चित रूप से हमारे एवं महाविद्यालय की छात्राओं को बहुत कुछ सीखने का मौका प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में पधारे हुये अतिथियों एवं उपस्थितों का आभार माधवी वेलफेयर सोसायटी के सोमनाथ शर्मा ने व्यक्त किया। इस अवसर पर एस.डी.गायकवाढ़, डा. रसीदखान, रजतदास वैष्णव, सुरेन्द्र करोसिया, पवन रजक, नीतेश साहू, संजय चैहान, दीपक पटैल, वृजेश गर्ग सहित बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति रही।

कार्यक्रम का संचालन  पत्रकार डा. एल.एन.वैष्णव ने किया

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