तीन सालों में झारखण्ड को बाघ परियोजना के लिए 4.43 करोड़ तथा हाथी परियोजना के तहत 2.14 करोड़ मिले
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तीन सालों में झारखण्ड को बाघ परियोजना के लिए 4.43 करोड़ तथा हाथी परियोजना के तहत 2.14 करोड़ मिले

झारखण्‍ड में मात्र 8.3% परिवारों के पास शौचालय. रांची, झारखण्ड 19 दिसम्बर 2014 ::  पर्यावरण, वन्य एवं जलवायु परिर्वतन मंत्रालय ने विगत तीन सालों में एशियाई शेरों के संरक्षण के लिए बाघ परियोजना के अन्तर्गत गुजरात को रू 34.39 करोड़ एवं देश के विभिन्न राज्यो को बाघ परियोजना मद में रू 488.58 करोड़ व हाथी परियोजना मद में रू 48.71 करोड़ जारी किया है। पिछले वर्षों सिंह, बाघ और हाथियों की आबादी में वृद्धि भी देखी गई। सांसद श्री परिमल नथवाणी के एक सवाल के जवाब में पर्यावरण, वन्य एवं जलवायु परिर्वतन राज्ये मंत्री ( स्वतंत् प्रभार ) प्रकाश जावड़ेकर ने 18 दिसम्बर 2014 को राज्य सभा में यह जानकारी दी है।

मंत्री महोदय ने यह भी बताया कि वन्य जीव प्राकृतवासों के एकीकृत विकास (Integrated Development of Wildlife Habitats) के तहत शेरों प्राकृतवासों के लिए वर्ष 2012-13 में रू 10.39 करोड़ का कोष जारी किया गया जो 2013-14 में खत्म  हो गया। जबंकि 13वें वित्तं आयोग के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2012-13 व 2013-14 में प्रति वर्ष रू 12 करोड़ जारी किया गया। श्री जावड़ेकर ने बताया कि बाघ परियोजना के अन्तिगर्त कुल 488.58 करोड़ जारी किए गए थे जिसमें से 4.43 करोड़ झारखण्ड के लिए था। उसी तरह हाथी परियोजना मद में कुल 48.71 करोड़ जारी किए गए जिसमें झारखण्ड  को 2.14 करोड़ मिला।
Nathwani.उन्होंने बताया कि केन्द्र  प्रायोजित योजनाओं के अन्त र्गत वन्यड जीवों एवं उनके प्राकृतवासों के संरक्षण पर बीते तीन सालों में गुजरात को 16.91 तथा झारखण्ड को 2.80 करोड़ जारी किए गए। राज्य सभा सांसद परिमल नथवाणी ने जानना चाहा था कि वन विभाग द्वारा महत्वपूर्ण जानवरों जैसे बाघ, शेर और हाथियों की आबादी में वृद्धि के लिए किस तरह के कदम उठाए गए हैं. उनकी वर्तमान में आबादी क्या है. उनके लिए कितनी राशि स्वीकृत की गई है और उनके कल्याण में कितनी राशि का उपयोग किया जा चुका है।

मंत्री श्री जावड़ेकर ने बताया कि वन्य जीवन के साथ ही शेर,बाघ और हाथी जैसे महत्वीपूर्ण जानवरों की सुरक्षा व संरक्षण की जिम्मेवारी राज्य सरकारों की होती है। केन्द्र  सरकार वन्य जीव प्राकृतवासों के एकीकृत विकास बाघ परियोजना एवं हाथी परियोजना के लिए केन्द्र प्रायोजित योजना के तहत राज्य सरकारों को सहायता प्रदान करती है।

सदन में रखे गए जवाब के अनुसार शेरों की आबादी 2005 के 359,10 से बढ़कर 2010 में 411 हो गई जबकि बाघों की संख्या1 2006 में 1,411 थी जो 2010 में बढ़कर 1,706 हो गई तथा हाथियों की आबादी जो कि 2007 में 27,669 – 27,719 थी बढ़कर 2012 में 29,391 – 30,711 हो गई है।

सरकार द्वारा वन्य जीवों की सुरक्षा में उठाये गए कदमों की जानकारी देते हुए श्री जावड़ेकर ने बताया कि एशियाई शेरों को अत्याधिक संकटग्रस्ता प्रजातियों और प्राकृतवासों के पुनर्वास कार्यक्रम के तहत चिन्हित करते हुए केंद्र प्रायोजित योजना के एक अंग वन्यजीव प्राकृतवासों के एकीकृत विकास के अंतर्गत कार्रवाई की जा रही है।
सरकार ने शेरों, बाघों व हाथियों के प्राकृतिक आवासों को घेरे में लेते हुए विभिन्न  राज्यों  में सुरक्षित क्षेत्र विकसित किया है। शेरों, बाघों व हाथियों के शिकार और उनके व्यानवसायिक शोषण के खिलाफ उच्चकस्त रीय विधिक सुरक्षा उपलब्धऔ करायी गयी है और दोषियों के खिलाफ सख्तक सजाओं का प्रावधान किया गया है तथा उनके विरूद्ध अभियोजन चलाने के लिए सीबीआई को पर्याप्तक शक्ति दी गई है। यह जानकारी भी मंत्री श्री जावड़ेकर ने दी है।

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