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आचार्य तुलसी के आदर्श एवं सिद्धांत सबसे अधिक प्रासंगिक :: आचार्य श्री महाश्रमण

 Lens Eye - News Portal - आचार्य तुलसी के आदर्श एवं सिद्धांत सबसे अधिक प्रासंगिक :: आचार्य श्री महाश्रमण  नई दिल्ली, 16 जून, 2014 :: तेरापंथ के 11वें आचार्य श्री महाश्रमण ने कहा कि हिंसा के मुहाने पर खड़े विश्व को शांति और सद्भाव के मार्ग पर आगे बढ़ाने के लिए आचार्य तुलसी के आदर्श एवं सिद्धांत विशेषकर अणुव्रत आंदोलन, प्रेक्षाध्यान और जीवन विज्ञान का पाठ आज सबसे अधिक प्रासंगिक है।

            आचार्य श्री महाश्रमण रविवार को नई दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर स्थित अणुव्रत भवन में आचार्य तुलसी महाप्रयाण दिवस पर आयोजित सभा में अपने उद्गार व्यक्त कर रहे थे।

            उन्होंने कहा कि अंहिसा के मार्ग पर चलते हुए अच्छे इंसान और समाज का निर्माण करना ही आचार्य तुलसी को उनके जन्म शताब्दी वर्ष में सबसे बड़ी श्रृद्धांजली होगी। आचार्य ने कहा कि युवा पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण के कार्य में जोड़ने से देश-समाज का भला हो सकेगा। नई पीढ़ी को शिक्षित कर उनमें अच्छे संस्कारों के बीज बोना जरूरी है।

            उन्होंने कहा कि ’अणुव्रत-आंदोलन‘ के प्रणेता आचार्य श्री तुलसी ऐसे इतिहास पुरूष और महान संत थे जिन्होंने लाडंनू (राजस्थान) से देश ही पूरे विश्व में एक लौह पुरूष के रूप में अपने व्यक्तित्व एवं कृत्र्तिव की अमिट छाप छोड़ी। उनके द्वारा प्रतिष्ठापित ’प्रेक्षाध्यान‘ आज योग एवं चिकित्सा के क्षेत्रा में पथ प्रदर्शन बना हुआ है। इसी प्रकार ’जीवन-विज्ञान‘ की शिक्षा अच्छे समाज के निर्माण में अपनी सार्थकता साबित  कर रही है। जैन विश्व भारती विश्व विद्यालय के माध्यम से लाखों युवा उच्च शिक्षा ग्रहण करने में सफल रहे है।Lens Eye - News Portal - आचार्य तुलसी के आदर्श एवं सिद्धांत सबसे अधिक प्रासंगिक :: आचार्य श्री महाश्रमणइस अवसर पर साध्वी प्रमुखा कनक प्रभा, प्रोफेसर श्री महेन्द्र मुनि, मुनि श्री किशनलाल एवं साध्वी जिनप्रभा ने भी आचार्य तुलसी को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। कार्यक्रम का संचालन मुनि श्री दिनेश कुमार एवं श्री प्रमोद घोडावत ने किया। वक्ताओं ने कहा कि आचार्य तुलसी नामक महासूर्य का अस्त हुए 17 वर्ष हो गये, किन्तु उनके महान उत्तराधिकारी आचार्य महाश्रमण जी के माध्यम से उनकी ज्योति अमर है। साक्षात स्वर्णिम सुर्योेदय हुआ है। आचार्य तुलसी एवं आचार्य महाप्रज्ञ के अवदानों से हमारा इतिहास गढ़ा गया और आचार्य श्री महाश्रमण जी के महापुरूषार्थ से भविष्य गढ़ा जा रहा है।  आचार्य तुलसी युगदृष्टा-युगसृष्टा थे, जिन्होंने महिला समाज एवं साध्वी समाज के उत्थान के लिए महान कार्य किये।

            समारोह के मुख्य अतिथि दिल्ली विश्व विद्यालय के श्री राम काॅलेज आॅफ काॅमर्स के प्राचार्य डाॅ. पी.सी. जैन थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता दिल्ली विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष श्री पुरूषोत्तम गोयल ने की।

            प्रारंभ में अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष श्री के.एल. जैन ’’पटावरी‘‘ के अतिथियों का स्वागत किया । अणुव्रत न्यास के प्रबन्ध न्यासी श्री संपत लाल नाहटा और वित्त उपाध्यक्ष श्री पन्नालाल बैद ने न्यास की गतिविधियों पर प्रकाश डाला।

            व्यवस्था समिति के महामंत्राी श्री शांति कुमार जैन ने बताया कि आगामी 18 जून बुधवार को दिल्ली के यमुना क्रीडा स्थल पर दीक्षा महोत्सव और 25 जून को लाजपत नगर में आचार्य श्री महाप्रज्ञ जन्म दिवस समारोह में भाग लेने के बाद आचार्य श्री महाश्रमण 2 जुलाई को प्रातः के एल.जे. फार्म हाउस, वसंत कुंज से भव्यशोभा यात्रा के साथ अध्यात्म साधना केन्द्र, छतरपुर के लिए प्रस्थान करेंगे और अगले चार माह तक वहां चातुर्मास प्रवास पर रहेंगें। इस मौके पर संघ महानिदेशका द्वारा रचित गीत ’’वो अपरिमेय, वो अनुपमेय वो राष्ट्र संत कहलाये‘ की सुमधुर प्रस्तुति साध्वी वृन्द ने की।

            कार्यक्रम के मुख्य अतिथि  पी.सी. जैन ने आचार्य श्री महाश्रमण जी का सम्पूर्ण शिक्षा जगत की ओर से भावभीना स्वागत करते हुए कहा कि आचार्य तुलसी का अवदान ’अणुव्रत‘ विद्यार्थियों के लिए बहुत उपयोगी है। समारोह अध्यक्ष श्री पुरूषोत्तम गोयल ने आचार्य तुलसी द्वारा प्रदत्त अणुव्रत के संदेश को आचार्य महाश्रमण की अनुशासना मंे विश्वव्यापी नैतिक आंदोलन बनाने की मंगल कामना की।

मार्ग में मुस्लिम भाईयों ने आचार्य श्री का किया भावभीना स्वागतLens Eye - News Portal - आचार्य तुलसी के आदर्श एवं सिद्धांत सबसे अधिक प्रासंगिक :: आचार्य श्री महाश्रमण

           आचार्य श्री महाश्रमण जी रविवार को माॅडल टाउन से बारादरी, जामा मस्जिद, लालमन्दिर, अग्रवाल धर्मशाला, लाल किला होते हुए 15 किलोमीटर का पैदल विहार कर अणुव्रत भवन पहुॅचे।

            जामा मस्जिद पर मुुस्लिम बन्धुओं ने आचार्य श्री का भावभीना स्वागत किया। इस मौके पर श्री महाश्रमण जी ने कहा कि इंसान पहले इंसान है, फिर हिन्दु या मुसलमान है। इंसान मानवीय व्यवहार एवं सद्भाव रखे। सब धर्माे में मैत्राी एवं सद्भाव का प्रयास हो। हम सबके प्रति सद्भावना रखें। सत्य को सच्चा धर्म माने। अंहिसा को धर्म माने। सम्प्रदायों एवं जनता में दिल्ली की सत्य व अंहिसा की भावना जगे, मैत्राी के भाव बढ़े, नशामुक्त समाज बने। यही हमारी भावना है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से यह संदेश पूरे राष्ट्र में फैले तभी यहां मेरे चतुर्मास की सार्थकता सही मायनों में सिद्ध होगी।

Lens Eye - News Portal - आचार्य तुलसी के आदर्श एवं सिद्धांत सबसे अधिक प्रासंगिक :: आचार्य श्री महाश्रमणइस मौके पर मुस्लिम समुदाय के प्रमुख श्री इमरान ने कहा कि आचार्य जी के ’’निज पर शासन-फिर अनुशासन‘‘ के नारे ने हम सभी को बहुत प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि आचार्य श्री की बात ‘‘इंसान पहले इंसान है, फिर हिन्दु या मुसलमान है’’ भी बहुत प्रभावशाली नारा है। भारतीय एकता व अखण्डता के लिए आचार्य जी ने जो संदेश दिया है यह सभी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। आचार्य श्री के यात्रा पथ में जैन धर्म के स्थानकवासी सप्रंदाय एवं दिगम्बर संप्रदाय के व्यक्तियों ने भी भावभीना स्वागत किया।

Photograph & Content by Seema Thakur & Arpit Gupta, New Delhi.

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