आचार्य तुलसी रचनात्मक शिक्षक थे: मनोज तिवारी [ उत्तरी पूर्वी दिल्ली के सांसद एवं भोजपुरी फिल्म अभिनेता ]
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आचार्य तुलसी रचनात्मक शिक्षक थे: मनोज तिवारी [ उत्तरी पूर्वी दिल्ली के सांसद एवं भोजपुरी फिल्म अभिनेता ]

आचार्य तुलसी रचनात्मक शिक्षक थे: मनोज तिवारी [ उत्तरी पूर्वी दिल्ली के सांसद एवं भोजपुरी फिल्म अभिनेता ]  नई दिल्ली, 09  सितम्बर, 2014 :: अणुव्रत अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमण के सान्निध्य में आयोजित सप्त दिवसीय आचार्य तुलसी जन्म शताब्दी समारोह के तृृतीय चरण के छठे दिवस पर जनरल (रिटा.) डाॅ. वी.के.सिंह एवं उनकी पत्नी भारती सिंह, भोजपुरी फिल्म अभिनेता एवं उतरी -पूर्वी दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी, सुप्रसिद्ध सुफी गायक कलाकार कैलाश खेर आदि अनेक विशिस्टजन उपस्थित थे।

‘साम्प्रदायिक सौहार्द के पुरोधा आचार्य तुलसी’ विषय पर संबोधित करते हुए आचार्यश्री महाश्रमण ने कहा कि धार्मिक जगत में दो पद्धतियां रही है – एकाकी साधना और संघबद्ध साधना। संगठन में रहकर भी साधना की जा सकती है। भारत में अनेक धर्म-संप्रदाय है और विभिन्न वेशभूशा में साधु-सन्यासी रहते हैं और वे जनता का पथ दर्शन करते है। आचार्य तुलसी ने साम्प्रदायिक सौहार्द पर ध्यान दिया था। उनका धर्म-सम्प्रदाय के बारे में चिंतन था कि सम्प्रदाय लिफाफा है तो धर्म पत्र है, सम्प्रदाय शरीर है तो धर्म उसके भीतर रहने वाली आत्मा है। मुख्य लिफाफा नहीं है मुख्य पत्र है, शरीर का महत्त्व है पर उससे ज्यादा स्थायी आत्मा का महत्व है। धर्म सम्प्रदायों में अनेक बातों में अभिन्नता मिलती है, जिस तरह गायों का रंग अलग-अलग होता है किंन्तु उसका दूध सफेद ही होता है, आदमी का रंग रूप अलग-अलग हो सकता है किंतु रक्त एक जैसा ही होता है। सम्प्रदायों में भिन्नता है पर अहिंसा, सत्य धर्म सबका एक ही है। ऐसा कोई धर्म सम्प्रदाय नहीं हो सकता जो हिंसा, झूठ, बेईमानी करना सिखाता है। आचार्य तुलसी सम्प्रदायों के पुरोधा थे, उन्होंने कहा कि एक सम्प्रदाय के लोग दूसरे सम्प्रदाय के प्रति सौहार्द बनाए रखने का संदेश दिया।आचार्य तुलसी रचनात्मक शिक्षक थे: मनोज तिवारी [ उत्तरी पूर्वी दिल्ली के सांसद एवं भोजपुरी फिल्म अभिनेता ]आचार्यश्री महाश्रमण ने सांसद मनोज तिवारी की ओर इंगित करते हुए कहा कि राजनेता, पार्टियों के नेताओं के लिए राष्ट्र पहले नम्बर पर होना चाहिए पार्टियां नम्बर दो की बात होनी चाहिए। राष्ट्र के हित की बात जहां आती है वहां पार्टी गौण हो जाती है।

मुनि जयंत कुमार आचार्य तुलसी के प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि समस्या के समाधान के लिए आत्मस्थ होना, ध्यानस्थ होना होता है, जो व्यक्ति ध्यान में जाता है वह सौहार्द के घटक को घटित कर सकता है, आचार्य तुलसी हृदय सम्राट थे, उन्होंने साम्प्रदायिक सौहार्द, मानवीय एकता का संदेश दिया। साध्वी शांति लता ने व्यक्तव्य द्वारा अपने विचार व्यक्त किये।

कार्यक्रम के प्रारंभ में तेरापंथ महिला मण्डल द्वारा ‘‘ जय जय गुरुवर’’ गीत की सामुहिक प्रस्तुति दी।आचार्य तुलसी रचनात्मक शिक्षक थे: मनोज तिवारी [ उत्तरी पूर्वी दिल्ली के सांसद एवं भोजपुरी फिल्म अभिनेता ]इस अवसर पर प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्श कन्हैयालाल जैन पटावरी, जैन शेताम्बर तेरापंथी महासभा के अध्यक्श कमल दुगड़, मुख्य ट्रस्टी बिमल कुमार नाहटा, तुलसी दुगड़, विनोद बैद ने आए हुए विशिस्ट अतिथियों को साहित्य व स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया। कार्यक्रम का संचालन मुनि कुमार श्रमण ने किया।आचार्य तुलसी रचनात्मक शिक्षक थे: मनोज तिवारी [ उत्तरी पूर्वी दिल्ली के सांसद एवं भोजपुरी फिल्म अभिनेता ]जैन धर्म पूरे विश्व में अहिंसा, शांति का प्रतिक : जनरल वी.के.सिंह

विदेश मंत्रालय के राज्य मंत्री जनरल (रिटा.) वी.के. सिंह ने आचार्य तुलसी के प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि जैन धर्म पूरे विश्व में शांति , अहिंसा का प्रतिक हैै। आचार्य तुलसी ने ‘निज पर शासन, फिर अनुशासन’ का नारा दिया था। अनुशासित व्यक्ति ही दूसरे पर अनुशासन कर सकता। आचार्यश्री तुलसी का अहिंसा, नैतिकता का संदेश जन-जन तक पहुंचे और सभी को अहिंसा, नैतिकता का जीवन जीना चाहिए।

आचार्य तुलसी रचनात्मक शिक्षक थे: मनोज तिवारी

उत्तरी पूर्वी दिल्ली के सांसद एवं भोजपुरी फिल्म अभिनेता मनोज तिवारी – मैं सौभाग्यशाली समझता हूं कि मुझे यहां आने का अवसर मिला। आचार्य तुलसी रचनाकार शिक्षक थे, उनके बारे में बहुत सुना और पढा भी है वे ऐसे महापुरुष थे जिन्होंने धर्मक्रांति कर जन-जन में अहिंसा, नैतिकता का पाठ पढाया, साम्प्रदायिक सौहार्द, समन्वय एकता का कार्य कर देश को नई दिषा दी। इस दौरान उन्होंने एक गीत की प्रस्तुति दी।

 प्रेशक – डाॅ. कुसुम लूणिया (मंत्री)

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