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गोवेर्धन पर्वत उठा कर भगवान ने सिद्ध कर दिया कि एकता में बल है -श्री सदानंद जी महाराज

रांची, 12 जनवरी 2012 :: श्री कृष्ण प्रणामी सेवा समिति के द्वारा आयोजित श्रीमद
भागवद कथा के छठे दिन गुरु जी श्री सदानंद जी महाराज ने कृष्ण कि बाल लीलाओं कि कथा के प्रसंग के बारे बताते हुए कहा कि  गोवेर्धन पर्वत के माध्यम से बताया कि गोमाता कि पूजा करो, गोवेर्धन कि पूजा करो क्योकि गो माता कि शरीर मैं तेतीस करोड़ देवी देवताओ का वास है. इन्द्र का कोप हुआ और सात दिन और रात मुसलाधार बरसात हुई. जब गोकुल डूबने लगा तो भगवान ने सभी ग्वाल बाल के संग गोवेर्धन पर्वत एक छोटी उगली पर उदा लिया. गोवेर्धन पर्वत उठा कर भगवान ने सिद्ध कर दिया कि एकता में बल है एक साथ मिलकर असंभव को भी संभव किया जा  सकता है.
मीडिया प्रभारी सुरेश चौधरी  से बताया कि कल कि कथा में सुदामा प्रसंग, परीक्षित मोक्ष मुख रूप से होगा

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