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पांच साल में बाल श्रम से मुक्त होगा झारखंड : के एन त्रिपाठी [ ग्रामीण विकास , श्रम नियोजन और पंचायती राज मंत्री ]

Lens Eye - News Portal - पांच साल में बाल श्रम से मुक्त होगा झारखंड : के एन त्रिपाठी [ ग्रामीण विकास , श्रम नियोजन और पंचायती राज मंत्री ]रांची, झारखण्ड 12 जून 2014 :: ग्रामीण विकास , श्रम नियोजन और पंचायती राज मंत्री श्री के एन त्रिपाठी ने कहा कि झारखंड 5 सालों में बाल श्रम मुक्त होगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के सभी अधिकारियों – मुख्य सचिव से लेकर चतुर्थ वर्ग तक के सभी कर्मचारियों को निर्देष दिया जाएगा कि वे अपने यहां बच्चे को काम पर न रखें। उन्होंने कहा कि घरों में बाल मजदूर रखने पर रोक लगाने के लिए सभी कदम तुरंत उठाए जाएंगे। मंत्री महोदय विश्व बाल श्रम उन्मूलन दिवस के अवसर पर आज रांची में राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग और यूनिसेफ के द्वारा आयोजित एक बैठक में बोल रहे थे।

श्री त्रिपाठी ने इस अवसर पर बाल श्रम पर रोक लगाने के लिए सभी से सलाह और विचार भी मांगे ताकि सकारात्मक और अभिनव योजनाओं और नीतियों को तैयार किया जा सके। उन्होंने कहा कि विभाग ने हाल ही में दो नई अभिनय योजनाओं की शुरूआत की है, जो कि अप्रत्यक्ष रूप से बाल श्रम पर रोक लगाएगा।

बाल श्रम अस्वीकार्य है – यूनिसेफ
यूनिसेफ झारखंड के प्रमुख जॉब जकारिया ने कहा कि ‘‘ बाल श्रम पर रोक लगाने का सबसे प्रभावी रणनीति गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच को बेहतर बनाना है। उन्होंने कहा कि यदि राज्य में 6-14 वर्ष के सभी बच्चे नियमित रूप से स्कूल जाएं तो बाल श्रम नहीं होगा।
श्री जकारिया ने कहा कि बाल श्रम समाजिक रूप से अस्वीकार्य होना चाहिए, क्योंकि यह बच्चों के प्रति अपराध है और उनके अधिकारों का उल्लंघन करता है। ‘‘ हमें बाल श्रम के खिलाफ समाजिक मानदंड तैयार करने के लिए समाजिक लामबंदी की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ग्राम स्तर पर जागरूक बाल संरक्षण समिति बाल श्रम, बाल विवाह और बाल तस्करी पर रोक लगा सकता है। ’’

 बाल श्रम उन्मूलन के अन्य उपायों में शामिल है :

1) बाल श्रम और शिक्षा से संबंधित कानूनों को सख्ती से लागू करना
2) गरीबी और परिवारों की असुरक्षा को दूर करने के लिए समाजिक सुरक्षा योजनाओं का विस्तार और
3) सभी गांवों में जागरूक बाल संरक्षण समितियों का गठन।

 श्री जकारिया ने झारखंड में बाल श्रम के उन्मूलन के प्रयास में काॅरपोरेट्स, मीडिया, ट्रेड यूनियनों, चैम्बर आॅफ काॅमर्स और व्यापार समुदाय से समर्थन की अपील की।

 राज्य बाल संरक्षण आयोग की चेयरमैन, श्रीमति रूप लक्ष्मी मुंडा ने कहा कि बाल श्रम बच्चों के प्रति अपराध है और यह बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन भी है।

 हालिया वार्षिक स्वास्थ्य सर्वे ( एएचएस) 2011-12 के अनुसार, राज्य में कामकाजी बच्चों की संख्या लगभग 2..2 लाख है (3.2 प्रतिशत )। एएचएस के अनुसार, झारखंड में बाल श्रम का सबसे अधिक प्रतिषत पाकुड़ में है (6.4 प्रतिशत ), इसके बाद गोड्डा ( 6.2 प्रतिशत ), साहेबगंज ( 4.4 प्रतिशत ), पष्चिमी सिंहभूम ( 4.2 प्रतिशत ) और पलामू ( 4.1 प्रतिशत ) है। बाल प्रतिशत की दर औद्योगिक क्षेत्र वाले जिले और बड़े जिलो में कम है। सबसे कम दर वाले ये जिले हैं – बोकारो ( 1.2 प्रतिशत ), धनबाद ( 1.3 प्रतिशत ), पूर्वी सिंहभूम ( 1.6 प्रतिशत ), हजारीबाग ( 1.7 प्रतिशत ) और रांची ( 1.9 प्रतिशत )।

 बाल श्रम निषेध एवं विनियमन अधिनियम 1986, 14 वर्ष से कम आयु वाले बच्चों के लिए 18 व्यवसायों और 65 प्रक्रियाओं में रोजगार/नियोजन का निषेध करता है। कोई भी व्यक्ति जो बच्चों को इन व्यापारों में   नियोजित करता है या रोजगार देता है, उसे सजा के तौर पर 3 महीने से 1 साल तक की कैद और 10,000 से 20,000 रुपए तक का जुर्माना या दोनों हो सकता है।

 इस अवसर पर राज्य बाल संरक्षण आयोग की सदस्य, रंजना कुमारी और डा. सुनीता कात्यायनी, चैंबर आॅफ कामर्स के अध्यक्ष, बिकास सिंह, यूनिसेफ की बाल संरक्षण अधिकारी, प्रीति श्रीवास्तव और रांची के उपमहापौर संजीव विजयवर्गीय समेत अन्य लोग उपस्थित थे।

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