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भारत से मांस नहीं अध्यात्म निर्यात हो : आचार्य श्री महाश्रमण

Lens Eye - News Portal - भारत से मांस नहीं अध्यात्म निर्यात हो : आचार्य श्री महाश्रमणनई दिल्ली 16 सितम्बर, 2014 :: विश्व मैत्री एवं राष्ट्रीय क्षमापना दिवस का भव्य आयोजन जैन महासभा के तत्ववाधान में जापानी पार्क रोहिणी में मनाया गया। धर्म संसद के प्रभावक मंच पर जैन समाज की प्रमुख परम्पराओं के दिग्गज आचार्य सन्त मुनिराज-स्थान वासी परम्परा के आचार्य श्री डाॅ. शिवमुनि जी महाराज, मूर्तिपूजक सप्रदाय के आचार्य अभयदेव सूरी, तेरापंथ धर्मसंघ के आचार्य जी महाश्रमण जी एवं दिगम्बर संप्रदाय के मुनि श्री तरुण सागर जी उपस्थित थे। इस धर्म संसद में जैन एकता, विश्व मैत्री एवं अहिंसा विशयक सृृजनात्मक चिंतन मंथन से नवनीत निकलकर आया और कुछ महत्वपूर्ण उद््घोषणा हुई

अहिंसा के व्यापक प्रसार के साथा अनन्त चतुर्दर्शी के पश्चात प्रथम रविवार केा ‘‘विश्वमैत्री दिवस ’’ इंटरनेशनल फोरगिवनेस डे एवं ‘‘राष्ट्रीय क्षमापणी दिवस’’ मनाया जायेगा इस हेतु भारत सरकार एवं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी को ज्ञापन देकर आवशयक कार्यावाही की जायेगी।

आचार्य डाॅ. शिवमुनि जी महाराज ने कहा जैन धर्म सर्वोच्च धर्म हैं। यह भारत देश महावीर, गांधी, राम रहीम, नानक का देश है। हम संस्कारों की रक्षा करें, गो हत्या बंद करें, हिन्दु लड़कियों का जबरदस्ती धर्म परिवर्तन बन्द हो।Lens Eye - News Portal - भारत से मांस नहीं अध्यात्म निर्यात हो : आचार्य श्री महाश्रमणआचार्य श्री अभयदेव सूरी ने कहा कि भगवान महावीर की अहिंसा क्षमा एवं मैत्री को अपना कर समग्र विश्व अपना कल्याण करे।

अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी ने कहा कि जिन्होंने राग द्वेश व भय पर विजय प्राप्त कर ली वह ‘जिन’। जिन भगवान द्वारा प्रवर्तित जैन धर्म के सभी आचार्यों सन्तों का एक मंच पर संगम अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण है। आज का क्षमापना दिवस भी अद्भूत है। क्षमा के आधार पर विश्वमैत्री की स्थापना हो सकती है। आत्मा में आहलाद भी क्षमा से आ सकता है। हम सब में मैत्री बनी रहे, जैन विद्या को, जैन शासन के खजाने को, अगाध ज्ञान संपदा को आगे बढ़ाये, भारत की संत संपदा सौभाग्य की बात है। भारत से मांस का नहीं , हम भारत से अध्यात्म का निर्यात करें । हम सब में क्षमा व मैत्री का भाव पुश्ट रहे।Lens Eye - News Portal - भारत से मांस नहीं अध्यात्म निर्यात हो : आचार्य श्री महाश्रमणक्रान्तिकारी सन्त मुनिश्री तरुण सागर जी ने कहा कि धर्म संसद के इस मंच से जैन एकता के लिए दूर-दूर से आचार्य जी आये है। आपकी उपस्थिति नये इतिहास का निर्माण करेगी। हम सब तो श्रमण है। महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण है। आज हम इस मंच से सरकार से अपील करें कि गौ हत्या बन्द हो। देश में पुनः दूध घी की नदियां बहे, देश से मांस का निर्यात बन्द हो हां अगर निर्यात करना हो तो भ्रस्त्र नेता का भारत से निर्यात कर दे।

हजारों श्रोताओं की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम से अहिंसा, विश्वमैत्री, क्षमापना, जैन एकता पर्यावरण संरक्षण एवं कन्या भ्रुण सुरक्षा जैसे मार्मिक संदेश देने वाले इस कार्यक्रम का कुषल संचालन प्रोफेसर रतन जैन ने किया।

प्रेशकः डाॅ. कुसुम लूणिया (मंत्री)

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