लोहरदगा का लाल इंजीनियरिंग में दिखा रहा कमाल : पहले कंप्यूटर आॅपरेटिंग रॉबोट अब बनाया एरॉनेटिकल जासूसी ड्रोन
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लोहरदगा का लाल इंजीनियरिंग में दिखा रहा कमाल : पहले कंप्यूटर आॅपरेटिंग रॉबोट अब बनाया एरॉनेटिकल जासूसी ड्रोन

लोहरदगा का लाल इंजीनियरिंग में दिखा रहा कमाल : पहले कंप्यूटर आॅपरेटिंग रॉबोट अब बनाया एरॉनेटिकल जासूसी ड्रोन  लोहरदगा, झारखण्ड अप्रैल 21, 2015 :: खुली आंखों व विश्वास से देखे गए सपने सच हो ही जाते हैं। मजबूत इरादों से दुनिया में कुछ अलग करने का जज्बा जिन्दगी को नया आसमां देता है। ऐसे ही जज्बे की नजीर लोहरदगा के एक लाल ने पेश की है। लोहरदगा जिले के सदर प्रखंड के कुजरा ग्राम निवासी लाल अनुप नाथ शाहदेव व श्रीमती संध्या शाहदेव के पुत्र लाल अभिषेक नाथ शाहदेव ने कुछ ऐसा ही कमाल किया है। आर्यन इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नालॉजी भुवनेश्वर में में यह लाल अपने जलवे बिखेर रहा है। बचपन से ही टेक्नालॉजी की दीवानगी आखिर कमाल कर ही गई। लोहरदगा का लाल इंजीनियरिंग में दिखा रहा कमाल : पहले कंप्यूटर आॅपरेटिंग रॉबोट अब बनाया एरॉनेटिकल जासूसी ड्रोनलोहरदगा के इस बेटे की तमन्ना आखिर पूरी हो गई। अभिषेक ने एक सपना देखा था जो टेक्नालॉजी में झारखंड का नाम रौशन करने का था। खास बात यह कि अभिषेक के सपनों की हकीकत जमीन से जुड़ी थी। ऐसे में सपना सच होना ही था। आर्यन इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नालॉजी भुवनेश्वर में आखिर उसे टेक्नालॉजी की बारीकियां सीखने व जलवा बिखेरने का मौका मिल ही गया। वह रिमॉट गाइडेड उच्च कोटि का एक ऐसा जासूसी ड्रोन का निर्माण कर लिया है, जिसकी सहायता से न सिर्फ दूरस्थ चीजों को पता लगा सकता हैं, बल्कि उसकी तस्वीरें भी खींच सकता है। उसके इस ड्रोन का चयन लिट चेन्नई साइंस प्रदर्शनी 2015 के लिए कर लिया गया है। आर्यन इंस्टीट्यूट द्वारा उसे विशेष प्रशिक्षण के लिए विशाखापतनम भेज दिया गया है। लोहरदगा का लाल इंजीनियरिंग में दिखा रहा कमाल : पहले कंप्यूटर आॅपरेटिंग रॉबोट अब बनाया एरॉनेटिकल जासूसी ड्रोनअभिषेक ने बताया कि रिमॉट कंट्रोल के जरिए यह ड्रोन 500 मीटर दूर हॉरिजेन्टल अथवा भर्टिकल तथा लगातार 30 मिनट तक हवा में उड़ सकता है। उसने यह भी बताया कि इसमें 04 सेन्सर लगाए गए हैं। उसने कहा कि मोबाइल में गेम खेलने के लिए जो सेन्सर लगाए जाते हैं, उसी तक्नीक से इसे विकसित किया है। उसने कहा कि इसमें उन्होंने जीपीएस का इस्तेमाल किया है, ताकि उसके बैलेन्स उड़ान, डायरेक्शन और उंचाई आदि को नियंत्रित किया जा सके। इसमें ब्रशलेस मोटर लगाए हैं, जो 12000 आरपीएम से घूमता है। वर्त्तमान में यह ड्रोन अपने से सिर्फ 700 जीएम वजन ही ढो सकता है, जिसे बढ़ाने की कोशिश जारी है। अभिषेक ने बताया कि आर्यन इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नालॉजी भुवनेश्वर के प्रिंसिपल  एसएस खूटिया ने उसका उत्साहवर्द्धन किया और विगत 02-03 अप्रैल को विभिन्न इंस्टीट्यूट के 200 विद्यार्थियों ने ड्रोन मॉडल बनाने के लिए भाग लिया थे, जिसमें उसने बाजी मारी है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व लोहरदगा के इस लाल ने कंप्यूटर आॅपरेटिंग रॉबोट का निर्माण किया था, जिसके लिए उसे आइआइटी हैदराबाद 2014 के साइंस प्रदर्शनी पुरस्कृत किया गया था। बहरहाल इस ग्रामीण युवक लाल अभिषेक का मुख्य लक्ष्य इसरो व नासा पहुंचकर बेहतर प्रदर्शन करना है। वह लोहरदगा के डिवाइन स्पार्क पब्लिक स्कूल से मैट्रिक तक की पढ़ाई की उसके बाद रांची के गॉस्नर कॉलेज से आई.एस.सी पास कर वहां तक पहुंचा है।
Report & Photograph by Quaiyum Khan, Lohardaga.

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