भारत को एशिया का एम.आर.ओ. व्यवसाय का मुख्य केन्द्र बनाना चाहती है सरकार : जयंत सिन्हा [ केन्द्रीय नागरिक विमानन राज्य मंत्री ]
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भारत को एशिया का एम.आर.ओ. व्यवसाय का मुख्य केन्द्र बनाना चाहती है सरकार : जयंत सिन्हा [ केन्द्रीय नागरिक विमानन राज्य मंत्री ]

भारत को एशिया का एम.आर.ओ. व्यवसाय का मुख्य केन्द्र बनाना चाहती है सरकार : जयंत सिन्हा [ केन्द्रीय नागरिक विमानन राज्य मंत्री ]फरवरी | 7, 2017 :: भारत में विमानों के अनुरक्षण तथा मरम्मत (एम.आर.ओ.) व्यवसाय के वृध्धि का बहुत अवकाश है और सरकार देश को एशिया में एम.आर.ओ. का मुख्य केन्द्र बनाना चाहती है। भारतीय़ हवाई जहाजों का अनुरक्षण, मरम्मत एवं ओवरहॉल व्यवसाय लगभग 5000 करोड़ रुपए का है जिसमें 90 % का उपयोग भारत से बाहर श्रीलंका, सिंगापुर, मलेशिया, संयुक्त अरब अमीरात इत्यादि में किया जा रहा है । केन्द्रीय नागरिक विमानन राज्य मंत्री श्री जयंत सिन्हा ने राज्य सभा में फरवरी 7, 2017 को सांसद  परिमल नथवाणी के प्रश्न के प्रत्युत्तर में यह जानकारी दी।

मंत्रीजी के निवेदन के अनुसार, हमारी प्रौद्योगिकी तथा कौशल के आधार को ध्यान में रखकर सरकार अनुरक्षण, मरम्मत एवं ओवरह़ॉल के विकास से विदेशी एयरलाइनों से व्यवसाय आकर्षित करते हुए भारत को एशिया का हब बनाना चाहती है । तदनुसार, वर्ष 2016-17 की बजट घोषणा में कई बजट प्रावधान किए गए हैं, ऐसा निवेदन में बताया गया, ऐसा मंत्रीजी ने बताया ।

श्री नथवाणी जानना चाहते थे कि क्या देश के नागर विमानन क्षेत्र में अनुरक्षण, मरम्मत और पूर्ण सुधार (एम.आर.ओ.) इस क्षेत्र की निरंतर बढ़ती गति के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रहा है और ऐसी सुविधाओं की कमी के कारण एयरलाईन प्रचालक अपने विमानों को अन्य देशों मे ले जाते हैं जिसके कारण व्यवसाय और विदेशी मुद्रा की हानि होती है और एयरलाईनों के लिए एम.आर.ओ. सुविधाएं बढ़ाने के लिए और कारोबार बढ़ाने, रोजगार सृजन करने तथा देश में विदेशी मुद्रा की कमाई बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा उठाये गए क्या कदम उठाएं गए हैं ।

मंत्रीजी ने बताया कि देश में विमानों के अनुरक्षण तथा मरम्मत के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हैं । तथापि, ओवरहॉल के लिए उपलब्ध सुविधाएं केवल सीमित हैं । तदनुसार, कुछ भारतीय वाहक नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) द्वारा अनुमोदित विदेश में स्थित अनुरक्षण संगठन में अपने विमान ओवरहॉल अनुरक्षण सेवाओं के लिए विदेश भेजते हैं । तथापि ग्राहकों द्वारा वाणिज्यिक विचार, अनुरक्षण तथा पट्टा अपेक्षाओं की अवधि की निर्भरता पर नागर विमानन निदेशालय द्वारा अनुमोदित अनुरक्षण संगठनों में अनुरक्षण सेवाएं प्राप्त की जाती हैं, ऐसा मंत्रीजी ने बताया ।

मंत्रीजी के निवेदन के अनुसार, भारत में कुल 109 अनुमोदित अनुरक्षण, मरम्मत एवं ओवरहॉल संगठन हैं, जिनमें से 7 संगठनों द्वारा विमानों की ओवरहोलिंग की जाती है, जिसमें एयर इंडिया इंजीनियरिंग सर्विसेज लिमिटेड (नई दिल्ली), एम.ए.एस.जी.एम.आर. एयरोटैक्निक लिमिटेड (हैदराबाद), जेट एयरवेज इंडिया लिमिटेड (मुम्बई), एयरवर्क्स इंडिया इंजीनियरिंग (मुम्बई), हिन्दुस्तान एयरोनोटिक्स लिमिटेड (कानपुर), इंडामेर एविएशन प्रा. लिमिटेड (मुम्बई) और एयरवर्क्स इंडिया इंजीनियिंग प्रा. लि. (होसुर, तामिलनाडु) शामिल हैं । कुल 109 अनुमोदित अनुरक्षण, मरम्मत एवं ओवरहॉल संगठन में अहमदाबाद का संगठन शामिल है, ऐसा मंत्रीजी ने बताया।

निवेदन के अनुसार, अनुरक्षण, मरम्मत एवं ओवरहॉल के लिए प्रयोग में लाए जाने वाले टूल्स तथा टूल किटों को सीमा शुल्क से मुक्त रखा गया है । यह छूट नागर विमानन महानिदेशालय द्वारा विमान अनुरक्षण संगठनों के अनुमोदित गुणवत्ता प्रबंधकों के प्रमाणित टूल्स एवं टूल्स किट की सूची के आधार पर प्रदान की जाएगी, ऐसा निवेदन में बताया गया।
निवेदन के अनुसार, देश में इसे सेक्टर के विकास हेतु वर्ष 2016-17 के बजट में सरकार ने कई राहतों की घोषणा की थी । अनुरक्षण, मरम्मत एवं ओवरहॉल में प्रयुक्त टूल्स और इल्स-किट्स को कस्टम ड्यूटी में छूट दी गई है ।

मंत्रीजी के निवेदन के अनुसार, अनुरक्षण, मरम्मत तथा ओवरहॉल के लिए भारत में लाए जाने वाले विदेशी विमानों के लिए अनुरक्षण की पूरी अवधि अथवा 6 माह, इनमें से जो भी कम हो, तक भारत में रहने की अनुमति प्राप्त होगी बशर्ते कि इसके द्वारा ठहराव की अवधि के दौरान किसी वाणिज्यिक उडान का प्रचालन न किया जाए । 6 माह से अधिक ठहराव के लिए नागर विमानन महानिदेशालय से अनुमति अपेक्षित होगी, ऐसा मंत्रीजी ने बताया ।

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