मजिठिया वेज बोर्ड की सिफारिशें लागू करवाने के लिये नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स की ओर से जन्तर-मन्तर, नई दिल्ली में एक दिवसीय सांकेतिक धरना शीघ्र : संजय राठी
Latest News Top News

मजिठिया वेज बोर्ड की सिफारिशें लागू करवाने के लिये नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स की ओर से जन्तर-मन्तर, नई दिल्ली में एक दिवसीय सांकेतिक धरना शीघ्र : संजय राठी

मजिठिया वेज बोर्ड की सिफारिशें लागू करवाने के लिये नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स की ओर से जन्तर-मन्तर, नई दिल्ली में एक दिवसीय सांकेतिक धरना शीघ्र : संजय राठीरोहतक, हरियाणा  मार्च 30, 2015 ::  मजिठिया वेज बोर्ड की सिफारिशें प्रभावी रूप से लागू करने के लिये शीघ्र ही एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई जायेगी। इसके अलावा प्रबन्धकों एवं मीडियाकर्मियों के साथ भी वेज बोर्ड की सिफारिशों की लागू करवाने के लिये बैठक की जायेगी।
उक्त आश्वासन केन्द्रीय श्रम और रोजगार मंत्री बंगारू दतात्रे ने हरियाणा यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स के अध्यक्ष एवं नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संजय राठी के पूछने पर दिया। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का अध्ययन कर लिया है। शीघ्र ही सरकार कानून सम्मत कार्यवाही करेगी।
नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संजय राठी ने कहा कि मजिठिया वेज बोर्ड लागू करने में प्रबन्धकों द्वारा टाल-मटोल की जा रही है। जबकि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मजिठिया वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के आदेश जारी किये जा चुके हैं। इस सन्दर्भ में सर्वोच्च न्यायालय में प्रबन्धकों के विरूद्ध अवमानना की कार्यवाही भी आरम्भ की गयी है। लेकिन प्रबन्धक मामले को उलझा कर रखना चाहते हैं।
हरियाणा यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स के प्रदेशाध्यक्ष संजय राठी ने कहा कि शीघ्र ही मजिठिया वेज बोर्ड की सिफारिशें लागू करवाने के लिये नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स की ओर से जन्तर-मन्तर नई दिल्ली में एक दिवसीय सांकेतिक धरना दिया जायेगा। इसके अलावा केन्द्रीय श्रम मंत्री तथा प्रधानमंत्री को ज्ञापन भी दिया जायेगा। इस धरना कार्यक्रम में देशभर से मीडियाकर्मी जुटेंगे। एन.यू.जे. के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संजय राठी ने कहा कि मीडियाकर्मियों का प्रबन्धकों द्वारा क्रूरतापूर्ण तरीके से शोषण किया जा रहा है। जिसके चलते पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार अनैतिक प्रवृत्तियां पनप रही हैं। जिसका दुष्प्रभाव ब्लैकमेलिंग और पेड न्यूज के रूप में स्पष्ट दिख रहा है। इसका सर्वाधिक कुप्रभाव जनपक्षीय पत्रकारिता के रूप में दृष्टिगोचर हो रहा है।

Share

Leave a Reply