जनता विकास चाहती है और ये तभी हो सकता है, जब राज्य में कार्यरत सभी अधिकारी व कर्मचारी अपनी सोच में बदलाव लाएं :: रघुवर दास [ मुख्यमंत्री, झारखंड ]
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जनता विकास चाहती है और ये तभी हो सकता है, जब राज्य में कार्यरत सभी अधिकारी व कर्मचारी अपनी सोच में बदलाव लाएं :: रघुवर दास [ मुख्यमंत्री, झारखंड ]

जनता विकास चाहती है और ये तभी हो सकता है, जब राज्य में कार्यरत सभी अधिकारी व कर्मचारी अपनी सोच में बदलाव लाएं :: रघुवर दास [ मुख्यमंत्री, झारखंड ] जनता विकास चाहती है और ये तभी हो सकता है, जब राज्य में कार्यरत सभी अधिकारी व कर्मचारी अपनी सोच में बदलाव लाएं :: रघुवर दास [ मुख्यमंत्री, झारखंड ]  रांची, झारखण्ड । अगस्त | 14, 2015 :: जनता व्यवस्था में सुधार चाहती है। जनता विकास चाहती है और ये तभी हो सकता है, जब राज्य में कार्यरत सभी अधिकारी व कर्मचारी अपनी सोच में बदलाव लाएं। अपनी कार्य.संस्कृति को सुधारें, साथ ही कर्मयोगी बनकर राज्य के विकास को ही अपना लक्ष्य बना लें। ये बातें झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने नेपाल हाउस में नवनिर्मित योजना भवन के उद्घाटन व लोकार्पण के अवसर पर कहीं। उन्होंने कहा कि किसी भी कार्य के लिए मांग का मांगा जाना गलत नहीं हैं पर मांगने का तरीका सहीं होना चाहिए। हर छोटी सी छोटी बात को लेकर धरना दे देना, खासकर ऐसे मौके पर जब आपके यहां कोई भव्य कार्यक्रम हो रहा हो, आपके यहां कोई अतिथि आ रहे हो। ये बुद्धिमानी नहीं, बल्कि राज्य को गलत दिशा में ले जाने की एक बहुत बड़ी भूल है। इस भूल को सुधारना होगा, क्योंकि इससे राज्य की छवि खराब होती है, क्या इस छवि को ठीक करना, केवल सरकार का कार्य हैं। इस पर चिन्तन की आवश्यकता है। आखिर झारखंड की छवि को बेहतर बनाने का जिम्मा किसका हैं। ये केवल सरकार का नहीं, बल्कि ये उस हर व्यक्ति का जिम्मा हैं, जो झारखंड में रहता हैं, जो झारखंड को अपना मानता हैं, जो झारखंड को प्यार करता हैं। सभी का झारखंड और सभी इसके, तो फिर इसके सम्मान और विकास पर, सभी को एक होना पड़ेगा और हमने इस पर कार्य करना भी शुरु कर दिया है। पांच वर्ष के अंदर, हम झारखंड को विकसित झारखंड बना देंगे, इस सोच के साथ हम आगे बढ़ रहे हैं।जनता विकास चाहती है और ये तभी हो सकता है, जब राज्य में कार्यरत सभी अधिकारी व कर्मचारी अपनी सोच में बदलाव लाएं :: रघुवर दास [ मुख्यमंत्री, झारखंड ]उन्होंने कहा कि अपने यहां फाइल को घूमाने की भी एक गंदी परंपरा हैं, फाइल को घूमाने की जगह, फाइल को लाइफ बनाइये, क्योंकि कल यहीं फाइल घूमाने की परंपरा आपके साथ घट गई तो सोच लीजिये, आपका क्या होगा। इसीलिए जरुरत हैं, कार्य.संस्कृति में सुधार लाने की। उन्होंने कहा कि आप को सोचना होगा, कि ईश्वर ने आपको ये जीवन किसलिए दिया और आप इस जीवन को किस प्रकार जी रहे है। उन्होंने कहा कि आप इस जीवन को जनसेवा में लगा दें। ईमानदारी को जीने की कला बना लें। उन्होंने सभा में उपस्थित सभी को विश्वास दिलाया कि उनकी राजनीति जनता की सेवा के लिए है और वे इसे ईमानदारी के साथ जी भी रहे है। उन्होंने दुख व्यक्ति किया कि राज्य बने 14 साल से अधिक हो गयेए पर जिस प्रकार का विकास होना चाहिए था, वह विकास देखने को आज तक नहीं मिला, पर अब ऐसा नहीं होगा। वे खुद जनता के पास जाएंगे, उनसे पूछेंगे कि वे कैसा झारखंड बनाना चाहते हैं. वे आदिवासी भाई – बहनों के पास भी जाएँगे और उनसे पूछेंगे कि वे कैसा झारखंड देखना पसंद करते हैं.

उन्हीं के अनुसार, उन्हीं के अनुरुप योजनाएं बनेंगी और क्रियान्वित होंगी। इस साल के सितम्बर माह से आप देंखेंगे कि कैसे कार्य हो रहे हैं और बदलाव भी साफ दिखेगा। हम जनहित में चलायी जा रही योजनाओं को योजनाबद्ध तरीके से ले जाएंगे और राज्य को विकसित राज्य के रुप में लाकर खड़ेंगे, क्योंकि मेरा ये लक्ष्य हैं और सपना भी। उन्होंने इस अवसर पर भवन निर्माण विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को योजना भवन के सुंदर व सर्वोत्कृष्ट निर्माण के लिए बधाईयां दी।
इस अवसर पर नगर विकास मंत्री सी पी सिंह ने कहा कि राज्य मे जिस प्रकार विकास कार्य चल रहा हैं, उससे लोगों में विश्वास बना हैं कि राज्य में सरकार कार्य कर रही हैं। उन्होंने विभाग में अधिकारियों, कर्मचारियों, योजनाओँ को मूर्तरुप देने के लिए कार्यक्रमों, विभागों और उसके कोष के महत्व पर चर्चा की। साथ ही योजनाओं को जमीन पर उतारने की अपील सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से की।
मुख्य सचिव राजीव गौबा ने इस अवसर पर कहा कि जिस प्रकार से योजना भवन का निर्माण हुआ हैंए वह प्रशंसनीय हैं, साथ ही प्रशंसनीय है वे लोग जो इनके निर्माण से जुड़े। उन्होंने योजना भवन मंे कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों को एक दूसरे से जुड़ने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि आजकल कैसे विभिन्न निजी क्षेत्रों में आफिस कल्चर बदल रहे हैं और कैसे बड़े अधिकारियों और छोटे कर्मचारियों के बीच दूरियां समाप्त हो रही हैंए उसको सीखने और समझने की जरुरत हैंए क्योंकि बिना इस बदलाव के आत्मसात् किये, आप झारखंड को नई दिशा में नहीं ले जा सकते। उन्होंने विजन और टेक्नालाजी को बेहतर दिशा में ले जाने के लिए कार्यसंस्कृति में बदलाव लाने की बात को जोरदार ढंग से उठाया। राजीव गौबा ने बताया कि आजकल कार्यालय किस प्रकार के हो, वहां किन – किन चीजों की व्यवस्था हो, इस पर चिंतन शुरु हो गया हैं। यहीं कारण है कि आज कार्यालय में कैफेटेरिया.जिम तक की बातें हो रही हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारी व कर्मचारी आफिस जाने को बोझ न समझकरए इसे अपने कैरियर का महत्वपूर्ण भाग समझे। विकास आयुक्त आर एस पोद्दार ने सभा में उपस्थित सभी आगंतुकों का स्वागत करते हुए योजना भवन के निर्माण और उसके उद्देश्यों तथा इसकी कार्यशैली पर विस्तार से चर्चा की, जबकि वित्त विभाग के प्रधान सचिव अमित खरे ने योजना भवन के महत्व को दर्शाते हुएए सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया। इस सभा को सांसद राम टहल चौधरी और हटिया के विधायक नवीन जायसवाल ने भी संबोधित किया।जनता विकास चाहती है और ये तभी हो सकता है, जब राज्य में कार्यरत सभी अधिकारी व कर्मचारी अपनी सोच में बदलाव लाएं :: रघुवर दास [ मुख्यमंत्री, झारखंड ]

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