सच्चे हृदय से प्रेम करने वालों को परमात्मा की प्राप्ति सहज :: आचार्य पं. नीरज कृष्ण शास्त्राी
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सच्चे हृदय से प्रेम करने वालों को परमात्मा की प्राप्ति सहज :: आचार्य पं. नीरज कृष्ण शास्त्राी

सच्चे हृदय से प्रेम करने वालों को परमात्मा की प्राप्ति सहज :: आचार्य पं. नीरज कृष्ण शास्त्राीरांची, झारखण्ड । फरवरी । 17, 2016 :: देवी-दर्शन में चल रहे हैं वैष्णवी महोत्सव के सातवें दिन मण्डप पूजन, पाठ, हवन एवं योग शिविर के पश्चात् प्रारंभ हुआ भागवत कथा का प्रसंग। आज की कथा में गोपी उ(भव् प्रसंग का विस्तृत वर्णन करते हुए आचार्य पं. नीरज कृष्ण शास्त्राी ने कहा कि ‘‘ज्ञान आत्म संतूष्टि के लिए होता है, लेकिन ज्ञान का अभिमान भगवान से दूर करने वाला होता है’’। उद्धभव जैसे महाज्ञानी को भी भगवान ने श्रीराध्किा रानी के द्वारा प्रेम का पाठ सिखाया जिससे ये पता चलता है कि मनुष्य की पुर्णता, प्रेम में ही निहित् है।

रूक्मिणी मंगल की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जीव जब सच्चे हृदय से और समर्पण भाव से परमात्मा के प्रति आकर्षित होता है तो परमात्मा सारे संसार के बीच से उठाकर उसे अपने हृदय में लगा लेते हैं। अर्थात् सच्चे हृदय से प्रेम करने वालों को परमात्मा की प्राप्ति सहज है।

कथा के आज सातवें दिन में कृष्ण और रानी रूक्मिणी के विवाह प्रसंग की मनोरम झांकी एवं बारात निकाली गई और श्र(ालुओं द्वारा नृत्य एवं संगीत के साथ विवाह उत्सव मनाया गया। कृष्ण और रानी रूक्मिणी की छवी निहारते भक्तगण नहीं थक रहे थें। अंत में श्र(ालु भक्तों में विवाह उपरांत प्रसाद का वितरण भी किया गया।

यजमान के रूप में श्रीवैष्णवी शिवराम सेवा संस्थान महायज्ञ-महोत्सव समिति के सचिव रंजीत कुमार सपत्नीक वंदना कुमारी, पूज्य पिता श्रीमान रामकिशोर सिंह जी एवं माता श्रीमती सरस्वती देवीजी ने इस वार्षिकोत्सव-महायज्ञ-महोत्सव का संकल्प लिया। इस महायज्ञ की भागवत कथा का श्रवण करने के टाटीसिल्वे से आयीं महिला समूह की आशा कुमारी इस प्रंसग से भावविभोर हो गयीं और उन्होंने आयोजकों को इस भागवत कथा का आयोजन के लिए दिल से दुआ दी। इस आयोजन को सपफल बनाने में विनय सिंह, सोनु, मनोज, विवेक, शिल्पी, संजय, महावीर, राजीव, अमित, प्रवीण भारद्वाज, सुभाष, नीरज, मुनमुन, ध्न्नु, शुशील, मनीष, विनय, बबीता, उषा सिंह, सरीता, नंदा देवी,  सुमीरा देवी, नीलम व अन्य ग्रामिणों का अद्भुत सहयोग रहा।

कल दिनांक 18.02.16 को भागवत कथा के प्रसंग में सुदामा चरित्रा, शुकदेव जी कि विदाई, तक्ष्क द्वारा परिक्षित को मुक्ति एवं अन्य प्रसंगों के साथ होलिकोत्सव का आयोजन किया जायेगा। साथ ही साथ रामध्ुन अष्टयाम भी प्रारंभ होगा। मुख्य कार्यक्रमों दिनांक 19.02.16 को रामध्ुन अष्टयाम पूर्णाहुति, सामुहिक श्रीहनुमत् आराध्ना, संगीतमय हनुमान चालिसा तथा मानस सुंदरकाण्ड रामायण गायन, दिनांक 20.02.16 को श्रीवैष्णवी माताजी का महाभिषेक, पुजन, श्रृंगार, सामुहिक पुष्पांजलि, छप्पन भोग, माताजी की जीवंत झांकी, कन्या पूजन एवं सामुहिक आरती तथा दिनांक 21.02.16 को योग शिविर, भक्तमाल कथा प्रवचन, यज्ञ पुर्णाहुति, भंडारा, जागरण एवं नृत्य नाटिका का आयोजन किया जायेगा।

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