स्थानीय नीति झारखण्ड आंदोलन का बुनियादी हिस्सा है : सुदेश कुमार महतो [ अध्यक्ष, आजसू पार्टी ]
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स्थानीय नीति झारखण्ड आंदोलन का बुनियादी हिस्सा है : सुदेश कुमार महतो [ अध्यक्ष, आजसू पार्टी ]

स्थानीय नीति झारखण्ड आंदोलन का बुनियादी हिस्सा है : सुदेश कुमार महतो [ अध्यक्ष, आजसू पार्टी ]रांची, झारखण्ड अप्रैल 15, 2015 :: आज बरियातु स्थित मैथन हाॅल में आजसू पार्टी द्वारा जनभागीदारी सभा सह स्थानीयता पर लोकसंवाद का आयोजन किया गया। इसका उद्घाटन द्वीप प्रज्जवलित कर अतिथियों ने किया। आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश कुमार महतो ने कहा कि स्थानीय-नीति झारखण्ड आंदोलन का बुनियादी हिस्सा है। इसके बगैर झारखण्ड की गठन ही अधूरा है। स्थानीयता को सिर्फ नौकरी से जोड़कर देखना एक संकीर्ण दायरा में सीमित और अनुचित होगा। स्थानीयता भूमि एवं अचल सम्पति अर्जन नीति, शासन-प्रशासन में भागीदारी, सार्वजनिक संस्थानों की प्रशासनिक भागीदारी, नियोजन नीति, शिक्षा एवं प्रवेश नीति, व्यवसाय एवं संविदा नीति जनसंवाद के माध्यम से स्थानीयता के संदर्भ में विचार का समावेश हो।

द्वितीय सत्र में मंत्री चंद्रप्रकाश चैधरी नें कहा कि झारखण्ड एक विशेष राज्य है। यहां के लोगों की सूरक्षा के लिए कई प्रकार के कानून बने है। लेकिन उनका अनुपालन नहीं हो पाता है। हमें इस मुद्दे को लेकर निचले स्तर पर जाने की आवश्यकता है।

इस कार्यक्रम में बोलते हुए झारखण्ड के प्रसिद्ध शिक्षाविद् डाॅ. बी.पी केसरी ने कहा कि यह लोक संवाद झारखण्ड के लिए नवजीवन का संचार करने वाला है। झारखण्ड के लोग लम्बे समय से अपनी सांस्कृतिक और राजनीतिक पहचान के लिए संधर्ष करते रहें हैं। यह संकट काल है अपने अस्तित्व की लड़ाई हमें जारी रखनी होगी।

डाॅ गिरिधारी राम गोंझू के कहा कि आज हम अपने घर में परदेशी बन गए हैं। यहां कल करखाने खुले, खदान खुले जिनसे यहां के लोग विस्थापित हुए मगर नौकरियां बाहरी लोगों को मिली। उन्होंने कहा कि अगर स्थानीय नीति नहीं बनी तो झारखंडियों की पहचान समाप्त हो जाएगी।

प्रो0 संजय बसु मल्लिक ने कहा कि अस्मिता का मामला तभी उठता है, जब उसे चुनौती दी जाती है। उन्होंने कहा कि भारत बहुराष्ट्रीयता वाला देश है। जिसमें शामिल सभी राष्ट्रों की अलग-अलग पहचान है। उन्होंने कहा कि एक बड़ा सवाल यह है कि किस समय सीमा तक बाहरी लोगों को स्थानीय माना जाए।

लोहरदगा विधायक कमल किशोर भगत ने कहा कि जिनके लिए राज्य बना 14 वर्षों के बाद भी उनके हक और अधिकार की नीतियों का नहीं बनना हमारे लिए दुर्भाग्य की बात हैं। सारकार को अविलम्ब यहां के मूलवासियों के लिए ठोस नीति बनाने की पहल करनी होगा।

जुगसलाई विधायक राजचंद्र सहीस ने कहा कि हमे कठीन आंदोलन के बाद अलग राज्य मिला है। अपने अधिकारों की सूरक्षा के लिए हमें सजग रहना पडेगा। उन्होंने कहा कि हम इस सवाल को पूरी जिम्मेंवारी के साथ सरकार के समक्ष रखेंगे।

तमाड़ विधायक विकास मुण्डा नें स्थानीयता नीति को गंभीर मुद्दा बताते हुए इसपर पार्टी की पहल को एक सराहनीय प्रयास बताया।

पूर्व विधायक श्री उमाकांत रजक ने भी स्थानीयता पर अपने विचार व्यक्त किया। इस लोक संवाद में प्रदेश के सभी जिलों से प्रतिनिधि शामिल हुए और अपने बहुमुल्य सुझाव दिए।

कार्यक्रम के आरम्भ में आजसू पार्टी के केंद्रीय प्रवक्ता डाॅ देवशरण भगत ने विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि 14 वर्षो में स्थानीयता तय करने के लिए कई समितियां बनी। उन्होंने कहा कि यह राज्य किसी के नकल से नहीं, बल्कि अपने अकल से चलेगा।

कार्यक्रम में आजसू पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष प्रभाकर तिर्की ने प्रजेंटेशन के माध्यम से स्थानीयता के संबंध में विभिन्न मुद्दोे को रखा। यह मुद्दा महज नौकरियों से जुडा हुआ नहीं है। बल्कि हमारी पहचान से जुडा हुआ है।

कार्यक्रम का संचालन विनय भरत ने किया। इस अवसर पर रौशन लाल चैधरी, हसन अंसारी, दामोदर महतो, बी के चांद, डाॅ शीन अख्तर, जे एन सिंह, अजलुस इंदवार, अब्राहम मिंज, सतोष सहाय, महिला नेत्री वायलेट कच्छप, सुचिता सिंह, सुधारानी बेसरा, सहित कई लोगों ने अपना सूझाव दिए।

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