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बिरसा मुण्डा तीरंदाजी अकादमी, सिल्ली को नेशनल अवार्ड फोर चाईल्ड वेलफेयर-2015 (Institution Group) का पुरस्कार

14-awardनवम्बर । 14, 2016 :: बिरसा मुण्डा तीरंदाजी अकादमी, सिल्ली को नेशनल अवार्ड फोर चाईल्ड वेलफेयर-2015 (Institution Group) का पुरस्कार राष्ट्रपति भवन दिल्ली, में माननीय राष्ट्रपति द्वारा अकादमी के अध्यक्ष श्रीमती नेहा महतो को प्रदान किया गया। यह पुरस्कार महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार के अनुशंसा पर माननीय राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया जाता है।

बिरसा मुण्डा तीरंदाजी अकादमी शुरूआत दिनांक 11 अगस्त 2010 को रांची जिल के सिल्ली प्रखण्ड मुख्यालय में राज्य के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सुदेश कुमार महतो के कर कमलों से हुआ। श्री महतो इस केंद्र के मुख्य संरक्षक भी हैं। गत लगभग 6 वर्षों में तीरंदाजी के क्षेत्र में यह केंद्र राष्ट्रीय स्तर पर जाना जाने लगा है। इस केंद्र में कोच के रूप में कार्यरत प्रकाश राम एवं शिशिर महतो ने हुनरमंद बना दिया है। परिणाम स्वरूप यहां के लगभग सभी प्रशिक्षु राज्य, राष्ट्र अथवा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई न कोई मेडल लगातार प्राप्त करते जा रहें है।

यहां के तीरंदाजी प्रशिक्षु अपने दक्षता एवं प्रदर्शन से राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाने में सफल हुए हैं। राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित शिविरों में भी ये प्रशिक्षु स्थान प्राप्त करते रहें हैं। यहां बालक एंव बालिकाओं दोनो वर्ग के सदस्यों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है जिनका चयन स्कूल बेसिस पर किया गया है। ये प्रशिक्षु केंद्र में अपने प्रशिक्षकों के साथ 8-8 घंटे तक पसीना बहा कर अपनी प्रतिभा को निखार रहें हैं। तभी तो मात्र 6 वर्षों में इस केंद्र द्वारा 200 से अधिक मेडल्स प्राप्त किए जा चुके हैं।

इस केंद्र में लगभ 300 प्रशिक्षु प्रशिक्षण प्राप्त कर रहें हैं। ये प्रशिक्षु अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं। और इनकी आर्थिक परिस्थितियां भी अनुकूल नहीं है। फिर भी इन्होंने इस केंद्र के माध्यम से राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है।

केंद्र में दिव्यांग प्रशिक्षुओं को भी प्रतिभा निखारने का मौका दिया जा रहा है। यहां के बोंज सुंडी एवं सुशील जैसे प्रशिक्षु तीरंदाज अपनी कठिन शारीरिक सीमाओं को लांघ कर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहें हैं। ज्ञातव्य हो कि सिल्ली में में दिव्यांग बच्चो के लिए एक विशेष प्रशिक्षण केंद्र की भी स्थापना की गई है जिसके माध्यम से इन प्रतिभाशाली बच्चों को भी समाज की मुख्य धारा से जोडने का प्रयत्न किया जा रहा है। इस प्रयास के बहुत ही उत्साहवर्धक परिणाम सामने आऐ हैं और कोशिश यह भी की जा रही है कि इस प्रकार के दिव्यांग बच्चों को जिनमें तीरंदाजी की थोड़ी भी प्रतिभा हो उन्हें इस केंद्र से जोड़ा जाय और उन्हें इतना प्रतिभावान बनाया जा सके कि वे देश में अपनी पहचान बनाएं और अपने भविष्य को सही आकार दे सकें।

केंद्र द्वारा साधनहीन ग्रामीणों को प्रशिक्षण एवं सुविधाएं उपलब्ध करा कर तीरंदाजी के क्षेत्र में उनहें स्थापित करते हुए राज्य एवं देश का नाम रौशन किया जा रहा है। केंद्र का मुख्य लक्ष्य है कि जल्द से जल्द यहां के अधिक से अधिक प्रशिक्षु अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में लक्ष्य बेध कर देश का नाम रौशन कर सकें।

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