राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी का सपना था कि हमारा देश और गांव स्वच्छ हों :: रघुवर दास [ मुख्यमंत्री, झारखंड ]
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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी का सपना था कि हमारा देश और गांव स्वच्छ हों :: रघुवर दास [ मुख्यमंत्री, झारखंड ]

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी का सपना था कि हमारा देश और गांव स्वच्छ हों :: रघुवर दास [ मुख्यमंत्री, झारखंड ] रांची, झारखंड | अगस्त | 18, 2015 :: झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने आज आयोजित एक कार्यक्रम में ‘‘स्वच्छ स्कूल – स्वस्थ बच्चे’’ अभियान का शुभारंभ किया। एक महीने तक चलने वाला यह कार्यक्रम आज से शुरू होकर 17 सितंबर तक चलेगा। इस अभियान के तहत स्कूलों में एक महीने तक स्वच्छता को लेकर कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यह कार्यक्रम शिक्षा विभाग के द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से शुरू किया गया है।

कार्यकम का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, कि ‘‘हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी का सपना था कि हमारा देश और गांव स्वच्छ हों। इसी सपने को पूरा करने के लिए हमारे प्रधानमंत्री जी ने स्वच्छ भारत मिशन की शुरूआत की है। स्वच्छ विद्यालय-स्वच्छ बच्चे उसी मिशन की एक कड़ी है। उन्होंने स्वच्छता को बच्चों के जीवन की प्रमुख आवश्यकता बताते हुए इस बात पर बल दिया कि स्कूलों में आधे घंटे की कक्षा बच्चों को स्वच्छता, साफ-सफाई एवं अन्य व्यावहारिक शिक्षाओं के लिए होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे अपने-अपने स्कूलों में इस अभियान की सफलता सुनिश्चित करें ताकि उनका स्कूल एक माॅडल स्कूल के रूप स्थापित हो सके”।

शिक्षा विभाग की मंत्री, डा. नीरा यादव ने कहा कि, ‘‘स्वच्छ विद्यालय-स्वस्थ बच्चे’’ अभियान का मकसद बच्चों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता पैदा करना है। यदि हमने बच्चों के अंदर स्वच्छता को लेकर जागरूकता पैदा कर दी तो इसका संदेश उनके माध्यम से परिवार और समाज के अंदर पहुंचाया जा सकता है। बच्चों में यदि शौचाालय के उपयोग की आदत पैदा हो जाती है, तो परिवार और समाज में भी इस अभ्यास को अपनाने का दबाव बढ़ेगा, जो कि इस अभियान का उद्देश्य है।’’ उन्होंने कहा कि बच्चे इस अभियान के माध्यम से स्कूलों और समुदायों में स्वच्छता के वाहक बन सकते हैं।

शिक्षा विभाग की सचिव, अराधना पटनायक ने कहा कि, सरकार ने झारखंड के सभी स्कूलों में लड़के एवं लड़कियों के लिए शौचालय की सुविधा को सुनिश्चित कर दिया है। अब इन शौचालय की देखरेख और सुचारू रूप से उपयोग एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने अभियान के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि इस एक महीने के अभियान के दौरान शौचालय की देखरेख और उपयोग को लेकर विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों को प्रशिक्षित किया जाएगा । उन्होंने कहा कि अभियान के माध्यम से बच्चों में साफ-सफाई एवं स्वच्छता के प्रति जागरूकता भी पैदा होगी, जो कहीं न कहीं परिवार एवं समाज को भी प्रभावित करेगा।

पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के प्रधान सचिव, ए. पी. सिंह ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित कुछ स्कूलों को छोड़कर लगभग सभी स्कूलों में पानी की सुविधा उपलब्ध करा दिया गया है। इससे स्कूलों में स्वच्छता को सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी। उन्होंने इस अभियान को समाज में स्वच्छता के प्रति जागरूकता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि उनका विभाग स्वच्छता के प्रति प्रतिबद्ध है और इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए इस वर्ष 650 पंचाायतों को खुले में शौच से मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए झारखंड की यूनिसेफ प्रमुख, डा. मधुलिका जोनाथन ने कहा कि ‘‘ यह अभियान स्कूलों में स्वच्छता को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित होगा। यह बच्चों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ उनमें स्वास्थ्य को लेकर भी जागरूकता पैदा करेगा।’’ डा. जोनाथन ने कहा कि यूनिसेफ इस अभियान की सफलता के लिए शिक्षा विभाग को अपना पूरा सहयोग प्रदान करेगा।

कार्यक्रम में माध्यमिक शिक्षा विभाग के निदेशक, मनीष रंजन, यूनिसेफ के पेयजल एवं स्वच्छता विशेषज्ञ, कुमार प्रेमचंद, यूनिसेफ के शिक्षा विशेषज्ञ विनय पटनायक, यूनिसेफ के कम्यूनिकेशन अधिकारी, मोइरा दावा के अलावा सभी जिलों के डीएसई एवं डीईओ के साथ-साथ विभिन्न एनजीओ के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।

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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी का सपना था कि हमारा देश और गांव स्वच्छ हों :: रघुवर दास [ मुख्यमंत्री, झारखंड ]Ranchi, Jharkhand | August  | Tuesday |18, 2015 :: The Department of HRD & Drinking Water & Sanitation with UNICEF support launched the “Swachh Vidyalaya, Swasth Bachhe” Programme here today.

The programme began with an address by UNICEF child reporters 11 year old Kiran Kumari and 13 year old Rahul Roy from Government Middle Schools of Nagri & Ratu in Ranchi. They spoke about the importance of handwashing; toilet use and safe drinking water and shared their experiences in spreading the hygiene and sanitation message amongst their peers and family.

Raghubar Das, Chief Minister, Jharkhand said, “I am guided by Mahatma Gandhi’s dream of a swachh village with healthy and educated citizens. I appeal to all teachers, DSEs, BEEOs and other government officials to help realize this dream by creating model schools and villages.”

He urged the HRD department to organize a daily 30 minute session for children in schools on various issues such as sanitation and hygiene practices, etc. He said, “Children are agents of change and they can carry the sanitation and hygiene messages back to their family and community. The SMC can support this effort by monitoring the activities in the village and mobilizing the community to create a swachh village.”

Dr. Neera Yadav, Minister, Department of HRD said, “The state can progress only when its citizens are healthy. This can be possible if sanitation and hygiene practices are adopted by all. School children can be messengers and brand ambassadors for the Swachh Vidyalaya and the national Swachh Bharat initiative. Various activities are lined up during the month long programme and I urge all teachers, SMC, children, development partners and the media to support the programme and make it a success.”

Ms. Aradhana Patnaik, Secretary, Department of HRD said, “All government schools in Jharkhand have toilets for boys and girls in Jharkhand. This has been made possible because of the convergence between departments and the work at the ground level by teachers, SMCs, development partners and PSUs. The challenge is the use and maintenance of these toilets for which the role of the Bal Sansad members and teachers becomes very important.”

Dr. Madhulika Jonathan, Chief UNICEF Jharkhand said, “Any child centered programme or initiative can be successful only if the children are brought on board, consulted and provided a platform to voice their opinion on that issue. Child participation and empowerment is critical to the success of any campaign.”

The programme was attended by teachers, DSEs, BEEOs, NGO partners amongst others.

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