कलश जल यात्रा के साथ वैष्णवी महोत्सव का आगाज
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कलश जल यात्रा के साथ वैष्णवी महोत्सव का आगाज

कलश जल यात्रा के साथ वैष्णवी महोत्सव का आगाजरांची, झारखण्ड 30  जनवरी 2015 :: श्रीवैष्णवी शिव राम सेवा संस्थान में वैष्णवी महोत्सव का शुभारंभ  प्रातः 8 बजे हनुमत पूजन, ध्वजारोहन और कलश-जल-यात्रा के साथ प्रारंभ हुआ। इस कलश-जल-यात्रा में शहर के विभिन्न क्षेत्रों गेतलातु, पंडरा, ध्ुर्वा, एचईसी, टाटी सिल्वे, किशोरगंज, रातु रोड, कांके, रूका डैम, ओरमांझी से हजारों-हजार की संख्या में  श्रद्धालु माता-बहनें कलश-जल-यात्रा में सम्मिलित होकर पूरे वातावरण को ‘‘जय माँ वैष्णवी’’ के उद्घोष से गुलजार कर दिया। कलश यात्रा के लिए प्रातः 9.30 में ढोल बाजे गाजे के साथ शोभायात्रा निकाली गयी जो देवी-दर्शन से शुरू होकर गेतलातु ग्राम भ्रमण करते हुए जुमार नदी से जल भर कर पुनः देवी-दर्शन में माँ वैष्णवी के चरणों में अर्पित किया गया। इस कलश जल यात्रा में रथ पर आचार्य पंडित जानकी रामाचार्य जी महाराज एवं यज्ञ आचार्य रविशास्त्राी जी विराजमान थे। शोभा यात्रा पंक्तियों में मुख्य यज्ञमान  रामकिशोर सिंह सपत्नी, पुरोहित विद्वानों की मंत्राध्वनि के मार्गदर्शन में पंक्तिब( थें। जिनके पीछे समस्त भक्तगण जयकारे के साथ चल रहे थें। नगारों की थाप और शहनाईयों की गुंज अति भक्तिमय मनोरम ध्वनि उत्पन्न कर रहे थे।
श्रद्धालु की भक्तिमय जयकारे से ऐसा प्रतीत हो रहा था कि मानो माता की विजय-रथ-यात्रा निकाली गयी हो, जिसमें विभिन्न रूपों में समस्त देवी-देवतागण भी शामिल हों। यह मनोरम दृश्य इतना दार्शिनिक था कि नजरे थमी की थमी रह जा रही थी। श्र(ा के इस सैलाव में हर भक्त डुबकी लगाकर पुण्य प्राप्त करने के लिए व्याकुल नजर आ रहे थे।
कलश स्थापना के पश्चात अखण्ड रामध्ुन पाठ प्रारम्भ हुआ, जिसका शुभारम्भ श्रीजनकपुरधाम, मिथिला के वयोवृ(-विद्वत्संत-श्रीगुरुदेव स्वामी पं. जानकीरामाचार्यजी महाराज के आचार्यत्व में, मिथिला के  विनय कुमारजी एवं  मुरलीध्रजी ‘व्यास’ सहित मानस प्रचार मंडल द्वारा किया गया। स्थानीय पुजारीजी पं.  अवध्ेश शास्त्राीजी एवं आचार्य पं.  रविशास्त्राीजी आदि विद्वानों के सक्रिय सहयोग से समस्त कर्मकाण्ड प्रारम्भ हुआ। तत्पश्चात् श्रद्धालु में पुंगल प्रसाद एवं महाप्रसाद का वितरण किया गया।
यजमान के रूप में श्रीवैष्णवी शिवराम सेवा संस्थान महायज्ञ-महोत्सव समिति के सचिव रंजीत कुमार सपत्नी वंदना कुमारी, पूज्य पिता रामकिशोर सिंह जी एवं माता  सरस्वती देवीजी ने इस वार्षिकोत्सव-महायज्ञ-महोत्सव का संकल्प लिया। इस महायज्ञ को सपफल बनाने में जगदम्बा प्रसाद सिन्हा,  सुदामा प्रसाद सिंह, विनय सिंह, बिरेन्द्र तिवारी, सुदामा चैबे, मनोज मिश्रा, विवेक, पिन्टु कुमार, कुणाल, संजय, राजीव,  बिरेन्द्र, अभिमन्यु, विकास, अमित, सुभाष, नीरज, कर्मा, आलोक, मुनमुन, ध्न्नु, प्रेमनाथ, सुभाष, राकेश, वैशाखी, शिल्पी, अमित, सरीता, सोनी, बबीता व अन्य ग्रामिणों का अद्भुत सहयोग रहा।

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